साहित्य

गुरूपूर्णिमा

रमेश कुमार द्विवेदी, चंचल

समर्पित करूँ गुरूदेव क्या, असार जग दिखता नही ।।

सार है तो कुछ ही नही, स्वीकारें भक्ती ही सही ।।

निःस्वार्थ अरू स्नेह से, अनुपम दिया जो ग्यान है।।

अवनी ते अम्बर मैं अँटा, इसमें अजब एहसान है ।।

मैं तो कहाँ निर मूर्ख जग में, विद्वान अब आदर करें ।।

यह देन गुरूवर आपकी, आशीष अरू श्रद्धा भरें ।।

हरि हर ते ऊपर आप गुरूवर, सब देवगण भी क्षीण हैं ।।

राम अरु घनश्याम ते भी, राधा औ सीता नीण हैं ।।

जिस ध्यान से अरू मान दे, दूरी किया अग्यान है ।।।

हीरा औ सोना धन औ दौलत, तुच्छ अरू मरूथान हैं ।।

सत्पथ दिखाये बुद्धि दें सद्, उरिन हो सकता नही ।।।

सत्कार अरू सम्मान चंचल, भाव खो सकता नहीं ।।

हमको सुझायें पूज्य गुरूवर, सम्मान भी आता नहीं।।।

अपमान सपने में न हो, यह भाव क्यों आता नही।। .

प्रण आज जगवासी करें, सम्मान सब गुरूजन करें।।

धन और दौलत सब ही नश्वर, सत्कार सेवा अदा करें ।।

आशुकवि रमेश कुमार द्विवेदी, चंचल

ओमनगर,सुलतानपुर, उलरा,चन्दौकी,

अमेठी,उ.प्र। मोबाइल….8853521398,9125519009।।

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