साहित्य

ईमान की सफर

उदय किशोर साह

खुद्दारी गार कर ना सको तो
गद्दारी भी तूँ मत करना
तुम पर विश्वास किया है दुनियाँ
उस विश्वास की हत्या मत करना

वफा तुमसे गर हाे ना सके तो
जफा भी जग से मत करना
दया धर्म से जग जिन्दा है
कृतघ्न जीवन में मत बनना

दोस्ती तुमसे निभ ना सके तो
दुश्मनी को जगह मत देना
जल जाती है सोने की भी लंका
एसा करम  कभी भी ना करना

भ्रष्टाचारी से त्रस्त है दुनियाँ
रिश्वतखोर को जन्म नहीं देना
गली गली में आवाज है उठती
एसा तंत्र जग को नहीं देना

गाँव शहर बेईमानो से भरा है
इसका कद्र कभी ना करना
चूस लेता है हर घर को ये दानव
इसको जग में अहमियत नहीं देना

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

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