साहित्य

जीत कर जाना है…

उषा शर्मा त्रिपाठी

सिर्फ जी कर ही नहीं तुझे जीत कर भी जाना है ऐ जिंदगी,
तेरी बेरुखी तेरे रंजोगम में भी खुशी ढुंढना है ऐ जिंदगी!

सर आंखों पर उठाते रहेंगे युं हि तेरे हर जुल्मों सितम को हम
सितम जारी रहें तेरे हम यूं हि मुस्कराते जायेंगे ऐ जिंदगी!

और जितने भी कांटें हो तेरे दामन में ड़ाल दे तु मेरी झोली में,
तेरी खातिर मौत को भी हम हंस के गले लगा लेंगे ऐ जिंदगी!

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