साहित्य

कदमो का प्रभाव

राकेश जाखेटिया

कुछ कदम तुम चलते
कुछ कदम हम चलते
कुछ कदम साथ चलते
देखते कदमों का प्रभाव !

पर मंजूर ना था उनको
जिनको साथ चलने में
दिखावा करते रहे….
और दिमाग से लड़ते रहे !

कदम तो डगमगा आएंगे
अगर दिल से साथ ना हो
अगर वो यू ना हटते
तो शायद ये यू ना मिलते !

उनके कदम क्या हटे ?
फिर दूसरों के साथ जुड़े
फिर क्या था…..
हटते गए कुछ जुड़ते गए !

✍️ राकेश जाखेटिया
संचार सेवा सदन लक्ष्मी नगर
दिल्ली 92 # 09810310065

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