साहित्य

कारगिल विजय दिवस

नम्रता श्रीवास्तव

भारतीय सेना के शौर्य पराक्रम का दिवस,
26 जुलाई मनाते हैं कारगिल विजय दिवस।
1999 में वीर जवानों ने शिकस्त दी पाकिस्तान को,
भारत मां की रक्षा में आहुति देने वालों का दिवस।।

18 हजार फीट की ऊंचाई पर युद्ध की सर्जना,
रणबांकुरों ने भी जोरदार की थी गर्जना।
मुश्किलों का किया सामना बेझिझक,
निश्चय किया सामना करना नहीं था पीठ दिखाना।।

60 दिन तक युद्ध का रहा तांडव,
वीर सपूतों का संघर्ष यथा पांडव।
सत्य न्याय के लिए लोहू बहाना मंजूर,
अनीति का नहीं अब चलेगा तांडव।।

हौसलों का तूफान दिल में बसा है,
हिंदुस्तान में उनका जीवन रमा है।
पानी में आग लगाने का हुनर रखते हैं,
उनकी सांसों में कर्तव्य का लहू बसा है।।

वतन के शहीदों का लहू रंग लाया,
जश्न- ए- आजादी का तिरंगा लहराया।
वतन की खुशबू जिनमें घुली मिली है,
दुश्मनों को सैनिकों ने धूल चटाया है।।

मातृभूमि तेरी जय हो ,विजय हो ,
देशभक्त तेरा सदा अमर हो।
जांबाज सैनिकों को मेरा नमन,
मातृभूमि के अमर शहीदों की जय हो।।

रचना✍️
नम्रता श्रीवास्तव (प्र०अ०)
प्रा०वि० बड़ेहा स्योंढा
क्षेत्र-महुआ,जिला-बांदा

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