साहित्य

कवि की कोई उम्र नहीं

मधु अरोड़ा

कौन कहता है कि,
कवि की उम्र नहीं होती।
उम तो अपनी गति से बढ़ती है।
जी के जंजाल में बंधती है।
माना की कविता की कोई उम्र नहीं,
जो ऐसा सोचते हैं व्यवहार में,
तो मैं पूछती हूंआज ये बात।
जब कवि की कोई उम्र नहीं ,
आशिकी हर उम्र में करे।
तो क्या शरीर के सब ,
अंग हैं अपनी जगह ।
सब बदलता है ,वक्त के साथ।
उम्र कविता तक रखिए जनाब ,
व्यवहार में शिष्टाता जरूरी है ।
अगर आप खुद सम्मान नहीं करेंगे ,
बहन बेटी का तो देश क्या सीखेगा।
अरे लेखनी बोलती है ,
भेद दिलों के खोलती है ।
व्यवहारिक भी बनिये।
आप थोड़ा संभल कर बोलिए जनाब,
वाणी आपके चरित्र का पैमाना है।
वही तो दिल में उतरने का बहाना है।

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