साहित्य

काव्य फुहार

             इन्द्रधनुष
डॉ.गोरथनसिंह सोढा 'जहरीला'

सूर्य की किरणों का विक्षेपण ही नभ में सुन्दर रंग बनाता है ।
सुबह को पश्चिम में शाम को पूर्व दिशा में इन्द्रधनुष बनता है।।

इसमें लाल नारंगी पीला हरा आसमानी नीला बैंगनी रंग होते।

सूक्ष्म बूँदों पर किरणों के पड़ने पर यह धनुष बनता है।।

दर्शक के पीठ पीछे सूर्य होने पर ही दिखाई देता है।
पानी के फुहारे पर सूर्य की किरणों से भी धनुष बनता है।।

‘जहरीला’ देवताओं के राजा इन्द्र का सम्बन्ध बादल वर्षा से है।
तभी इस सुन्दर रंगीन जल बूँदों का नाम इन्द्रधनुष बनता है।।

सर्वाधिकार सुरक्षित-

डॉ.गोरथनसिंह सोढा ‘जहरीला’
जिलाध्यक्ष
अखिल भारतीय साहित्य परिषद
बाड़मेर राजस्थान

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