साहित्य

काव्य गोष्ठी

मधु अरोड़ा

पड़ोसन है  वह प्यारी सी,
ताक झांक करे न्यारी सी।
बात बनाएं घंटों आकर,
समय का उसको भान नहीं ।
 क्या करना है ध्यान नहीं,
 बातें करें वह दुनियादारी की।
 पाठ पढ़ाएं समझदारी के,
 बच्चों को वह ज्ञान बखारे।
 सुबह सुबह उठकर आ जाए,
 चाय नाश्ता वह कर जाए। 
 बच्चों को भी पास बुला ले,
  पति को भी आवाज लगा ले।
  घर में बच्चे उछल कूद मचाएं,
  पड़ोसन बातों से हमें रिझाएं।
  तारीफ करें वह भर भर के,
  खाएं पकोड़े डट डट के।
  आज आई है घर वह मेरे ,
   कल काम आएगी सबसे पहले।
   मेरे रिश्तेदारों से पहले आए,
   पड़ोसी तो दुख सुख की शान,
   उनकी है यह पहचान ।
    अपनत्व रख साथ निभाते 
    हर समय साथ खड़ा पाते।।
                  
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