साहित्य

खोजती हूँ मैं

नीलम राकेश

पापा,
खोजती हूँ मैं
आपको
चाँद सितारों के बीच।

आप
दिख भी जाते हैं मुझको
अपनी चिर-परिचित
मुस्कान के साथ ।

फिर भी
यादों के गलियारे में
ढूंढती हूँ मैं
आपको ।

मायके
की हर ईट में
पाती हूँ
आपकी गंघ ।

फिर भी
चाँद सितारों के बीच
खोजती हूँ मैं
आपको ।

जानती हूँ
बसते हैं आप
हमारे ही
अंतःकरण में ।

फिर भी
यादों के गलियारे में
ढूंढती हूँ मैं
आपको ।

नीलम राकेश
लखनऊ

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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