साहित्य

खोजती हूँ मैं

नीलम राकेश

पापा,
खोजती हूँ मैं
आपको
चाँद सितारों के बीच।

आप
दिख भी जाते हैं मुझको
अपनी चिर-परिचित
मुस्कान के साथ ।

फिर भी
यादों के गलियारे में
ढूंढती हूँ मैं
आपको ।

मायके
की हर ईट में
पाती हूँ
आपकी गंघ ।

फिर भी
चाँद सितारों के बीच
खोजती हूँ मैं
आपको ।

जानती हूँ
बसते हैं आप
हमारे ही
अंतःकरण में ।

फिर भी
यादों के गलियारे में
ढूंढती हूँ मैं
आपको ।

नीलम राकेश
लखनऊ

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