साहित्य

कुमारी मंजू मानस की कलम से

सुबह हो गई

💐💐💐💐💐💐💐💐💐

चलो सूबह हो गयी अब 🌞🌝

अब तो उठ ज़ाओं 🌞🌞

कलियाँ🌷खिल 🌹गयी

तुम भी खिल ज़ाओं ना 🌻

अपनी मनमोहाक मुस्कान से 😀

सबको ज़िन्दगी मुस्काओ ना😊

इंताजार में सब बैठे है☕🍎

सुबह सुबह अपनी🌞🌝😊

मनमोहक अदाओं से 😊😊

गुड मॉर्निंग कह ज़ाओं ना 😊😊

थोड़ी सी मीठी मुस्कान देकर 😀😀

सबके लिये तुम प्यारे 😊😊

इस जग में सुन्दर तुम भी 👌👌

सुन्दर बन ज़ाओं ना 👍👍

जग में अपनी जगह बनाओ ना

दुनिया में क्या रखा है 👐

प्यारे खुद को अमर कर😊😊

इस ज़हाँ में 🙌🙌 😊

अपना प्यार लूटा ज़ाओं ना 🌻

आओं आओं अब तो आ ज़ाओं💃🙊

गुड मॉर्निंग कह ज़ाओ प्यारे 👭👧👩👴

सुबह की मीठी मुस्कान 👧👧👧👧

अब तो दे ज़ाओ प्यारे 💃😀😀😊

मंजू मानस 20.07.17चलो सूबह हो गयी अब 🌞🌝

अब तो उठ ज़ाओं 🌞🌞

कलियाँ🌷खिल 🌹गयी

तुम भी खिल ज़ाओं ना 🌻

अपनी मनमोहाक मुस्कान से 😀

सबको ज़िन्दगी मुस्काओ ना😊

इंताजार में सब बैठे है☕🍎

सुबह सुबह अपनी🌞🌝😊

मनमोहक अदाओं से 😊😊

गुड मॉर्निंग कह ज़ाओं ना 😊😊

थोड़ी सी मीठी मुस्कान देकर 😀😀

सबके लिये तुम प्यारे 😊😊

इस जग में सुन्दर तुम भी 👌👌

सुन्दर बन ज़ाओं ना 👍👍

जग में अपनी जगह बनाओ ना

दुनिया में क्या रखा है 👐

प्यारे खुद को अमर कर😊😊

इस ज़हाँ में 🙌🙌 😊

अपना प्यार लूटा ज़ाओं ना 🌻

आओं आओं अब तो आ ज़ाओं💃🙊

गुड मॉर्निंग कह ज़ाओ प्यारे 👭👧👩👴

सुबह की मीठी मुस्कान 👧👧👧👧

अब तो दे ज़ाओ प्यारे 💃😀😀😊

स्वच्छ पर्यावरण💐

💐पर्यावरण का मतलब होता क्या तुम मुझको बतलावो ना

💐इसको कैसे स्वच्छ बनाये अब तुम इसे समझाओ ना

💐रुको समझो अब आवो
आकर इससे नाता जोड़े

💐पर्यावरण का मतलब होता क्या अब मैं तुमको समझाती हूँ
💐इसको तोड़ो दो शब्दों में परि+आवरण
परि ,यानी की जो हमारे चारों ओर है
💐और आवरण यानी जो हमको चारो ओर से घेरे हुये है

💐अब तुम बतावो अब बच्चे हमारे चारों ओर क्या है जो हमें घेरे हुए हैं

💐जो पहले बताये अपनी नजर चारों ओर दौड़ाये उसे मिलेगा फूल

💐चुनी मुनी एक साथ बोली मैं बताऊँ मैं बताऊँ पहले मैं ही हाथ उठाऊँ

💐रुको रुको अरे रुक भी जावो एक एक कर अब तुम समझावो

💐पानी, धरती, पेड़, सड़क, घर ,स्कूल कॉलेज और बहुत बस

💐नदी सरोवर मंदिर मस्जिद गाय मछली और हाथी

💐हाँ हाँ बहुत अच्छा अब तुमको मिलेंगे फूल बहुत गुड़िया रानी जाना न रूठ

💐आवो एक एक कर हम इसको समझ जायेंगे

💐जानवर पेड़ पौधे धरती गगन सब मिलते है इसके अंदर

💐जैसे माँ का आँचल होता वैसे इसका आवरण होता

💐हम उसमे छुप जाते है वैसे ही आकाश के नीचे हम सब छुप जाते

💐धरती आसमाँ में जितने चीजे है अपनी आँखें मिचें

💐सोचो नदियाँ कितनी सुधता से कलरकव करती थी

💐हवा भी अपने उन्मुक्त गगन में हरदम बहते रहते है

💐मानव ने विनाश किया अपने ऐसो आराम के लिये खुद को इसका बलि दिया

💐जानवर का मार मार का जानवर का घर छिन लिया

💐उनका भोजन उनका पानी सब अपने ही नाम किया

💐अपने भोग विलाश की खातिर प्रकृति को प्रदूषित किया

💐इस पर्यावरण को संतुलन बिगाड़ सबको अपने बस में किया

💐आवो अब इसको हम
स्वच्छता का रूप कैसे बनावे
इसको इसका हक़ दिलाएँ

💐बोलो कैसे करोगे ये काम जब होगा बस तेरा ही नाम

💐बोलो कौन समझायेगा भारत को सुंदर पर्यावरण को स्वच्छ बनायेगा

💐एक एक कर हम पेड़ लगाएंगे नदियों में, कूड़ा नही फैलायेंगे

💐एक जगह का एक रास्ते जाना हों तो एक गाड़ी से जायेंगे

💐अगर चल सकें पैदल या साइकिल से ही हम जायेंगे

💐बेकार चीजो का नवीनकरण हम उसका उपयोग कर जायेंगे

💐हम सब मिलकर अब पर्यावरण को स्वच्छ बनायेगें इसको इसका हक़ मिलकर हम सब पुरे कर जायेंगे

💐पर्यावरण को बैलेंस हम मिकलर पूरे कर जायेंगे इसको स्वच्छता का पाठ समझायेंगे।

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

औरत तेरी कहानी

🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
औरत तेरी भी …
अजब कहानी हैँ ….
बस मुस्कुराना ….
यही तेरी ज़िन्दगानी हैँ …
बचपन से लेकर ….
बुढे होने तक …
अपने दिल की बात ….
अपने दिल मे ही…..
दबानी हैँ ….
कभी हँस कर …
कभी हँसा कर ….
कभी रो कर….
कभी आंसुओ को …
छूपा कर…..
बस मुस्कुराते हूए …
आपनी ज़िन्दगी…
बितानी हैँ….
कोई देख ना ले …
किसी को दर्द ना हो …
किसी को तेरे दुख
का एहसास ना हो …
किसी को तेरे ….
खुशियों का से….
कोई एतराज ना हो …..
बात इतनी सी हैँ….
गम ना करना ….
हरदम खुश रहना ….
कभी माँ के लिये
कभी पिता के लिये ….
और कभी भाई बहन के लिये …
कभी कभी…
अपने प्यार और ….
पति के लिये ….
तो कभी कभी …
अपने बच्चो के लिये …
बस iस एहसास मे …
जीती हैँ हँस कर ….
सारे गम पीती हैँ ….
कभी तो खुशियों का ….
अम्बार होगा …
उसका भी खुशियों से …
भरा संसार होगा …
वो भी करेगी …
अपने मन की …
मनमानी ….
वो भी बिना हीचक….
बिता देगी ….
अपनी सुन्दर ज़िन्दगानी …
बचपन से ही …
माँ का कहना मानी …
बड़े होने पे …
अपनी ज़िन्दगी की….
खूबसुरती का डर ….
और किसी के हवस का …
शिकार न हो….
इसलिये खुद को …
दुनियां से छूपा कर ….
और घर की ….
इज्जत को बचाकर ….
समाज का ख्याल आया ….
शादी के बाद स्वतंत्रता ….
का ख्याल आया ….
लेकिन यहां तो उसके हाथों मे ….
घर जी मालकिन बना दिया ….
ये घर तेरा हैँ….
ये सुन्दर सा ….
ये पाठ पढा दिया…
उसके बाद….
बच्चो की खुशियों ने ….
मन को मोह लिया ….
बूढ़ापे ने हाथ पैर को ….
नकाम कर दिया ….
अब आई तेरे लिये….
ये खुशीयाँ का अम्बार …
चल जाने को को हो जा…
तुम य़मलोक मे तैय़ार …
वँहा कर रहे…..
प्रभु तेरा इंतजार…..
अब तो सोचा रही मन मे….
आऊँगी अगले जन्म मे …..
मुझे बस खुशियां देना ….
और करूँगी बस….
खुशियों का इन्ताजार …..
औरत तेरी यही कहानी होगी ….
हर जन्म मे यही ज़िन्दगानी होगी …..

कुमारी मंजू मानस
बिहार शिक्षिका
छपरा सारण

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