साहित्य

मैं बनती मीरा दिवानी

किरण झा


काश बन जाती कोई कहानी
तुम बन जाते मेरे गिरिधर मैं बनती मीरा दिवानी

सुर संगम मैं छेड़ा करती
तुम मुरली की तान सुनाते
राग रागिनी की सरिता में
हम मिलकर डूबकी लगाते

हो जाती हर शाम सुहानी
तुम बन जाते मेरे गिरिधर मैं बनती मीरा दिवानी

लेकर हाथों में इक तारा
बेसुध हो कर नाचा करती
आओ मेरे गिरिधर नागर
बार बार पूकारा करती

प्रीत हमारी होती रूहानी
तुम बन जाते मेरे गिरिधर मैं बनती मीरा दिवानी

लेकर मटकी छोटी सी
मैं पनघट पर आ जाती
तेरे आने की आहट से
मैं शरमा शरमा जाती

चेहरे पर छाती चमक नूरानी
तुम बन जाते मेरे गिरिधर मैं बनती मीरा दिवानी

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