साहित्य

मैथिलीशरण गुप्त

डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”

एक बार चली तो रुक न सकी
लिखते लिखते न कलम थकी ,
एक ऐसा कवि अनोखा था ,
राष्ट्रीयता का झरोखा था ,
लेखन में गाँधीवाद रहा ,
और ओजपूर्ण संवाद रहा ,
भारत के गौरव की गाथा ,
रचनाओं मे जिसने वाचाँ ,
वह कवि हमारे भारत के ,
मैथिली शरण गुप्त कहलाते है

शब्द शक्तियों , अलंकारों से ,
और मुहावरे की झंकारों से ,
रिश्तों का सम्मान लिखा ,
नारी का अभिमान लिखा ,
भारत का इतिहास लिखा ,
भारतीय संस्कृति खास लिखा ,
सभ्यता और संस्कार लिखा ,
जीवन का आधार लिखा ,
वह रवि हमारे भारत के ,
मैथिली शरण गुप्त कहलाते है ।

आओ उनको हम याद करें ,
कुछ रचनाओं की बात करें ,
प्रबन्ध काव्य उनके मुक्तक ,
जो पढ़ते आऐ हम अब तक ,
सब उच्च कोटि की रचना है ,
खड़ी बोली से संरचना है ,
साकेत , पंचवटी व यशोधरा ,
जय भारत , काबा और कर्बला ,
रचयिता हमारे भारत के
मैथिली शरण गुप्त कहलाते है ।

डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”
सर्वाधिकार सुरक्षित
ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

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