साहित्य

माला के मोती

बातें दो शब्दों की

जयश्री बिर्मी

आईने में मुख और संसार में सुख दिखता है ,
किंतु होता नहीं हैं।

गन्ने में जहां गांठ होती है वहां रस नहीं होता,
और जहां रस होता हैं वहां गांठ नहीं होती।
जीवन में भी कुछ ऐसा ही हैं।

बोलने से पहले शब्द अपने बस में होता है,
और बोलने के बाद हम शब्दों के बस में हो जाते है।

संबंध बनाना आसान है,
किंतु उन्हें निभाना मुश्किल होता हैं।

सब परखने की कोशिश करते हैं,
किंतु समझ ने की कोशिश कोई नहीं करता।

सुख बांटने के लिए संगत तैयार,
दुःख बांटने के लिए अंगत चाइए।
जब जिंदगी हसाती है तो समझो कर्म फल हैं,
और जब रुलाती हैं तो समझो अच्छे कर्म करने का समय आ गया हैं।

जयश्री बिर्मी
अहमदाबाद

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