साहित्य

मानव मूल्य

नंदिनी लहेजा

यह तो तू भी जनता है मानव,
ईश्वर की बनायीं सर्वश्रेष्ठ कृति है तू
क्योंकि प्रेम,दया,करुणा,धैर्य,साहस,परोपकार जैसे,
अनेको गुणों से ईश्वर द्वारा नवाज़ा गया है तू
ये गुण ही तो तेरे जीवन के अनमोल मूल्य हैं मानव,
जो तुझे सृष्टि के अन्य प्राणियों से भिन्न है करते
पर होता है दुःख देख वातावरण आज का,
मानव मूल्य तेरे भीतर से गुम होते जो दिखते
प्रेम को नफरतों ने पछाड़ा,दया दब गई हैवानियत के आगे ,
धैर्य ,साहस हार जाता असफलता से,तो परोपकार भूले लालच के आगे
मानव मूल्य की परिभाषा ही बदल दी आज मानव ने
विकारों और अवगुणों के अंध में जो फसां
वहशीपन,भ्र्ष्टाचार ने ऐसे गिराए मानव मूल्य
मानव और पशु में कोई अंतर ना रहा

नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)

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