साहित्य

मंदिर की घंटी

प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे

करती सबके दिल को पावन
जब बजती मंदिर की घंटी
इसको सुन सारे खुश होते
पापा-मम्मी,अंकल-अंटी।

सुनकर मंदिर की घंटी को
ईश्वर याद है आता
मत घबराना कभी मनुज तुम
हमसे यह कह जाता

मंदिर की घंटी कहती है
बच्चों दुर्गुण तजना
मस्जिद,चर्च और गुरुद्वारा
एक देव को भजना

मंदिर की घंटी भाती है
भजन-आरती गाती
आकर के कानों में सबके
वह मिसरी बन जाती।
                   -प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे
                                 प्राचार्य
     शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
                       मंडला,मप्र

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