साहित्य

मेरा हृदय उद्गार!

गिरिराज पांडे

गर्हित जीवन से बेहतर तो मौत यशस्वी होती है
काम किया जो सबसे बेहतर जीवन में अमृत भर्ती है
सबके हित की बात करें जो वह मनुष्य कहलाता है
संघर्ष किया है जीवन में तो प्रगति हमेशा पाता है
श्रम मन समय लगाया जो निर्माण कार्य तब संभव है
ज्ञान कर्म जब साथ मिला तो उपलब्धि भी संभव है
चल कर अनीति पर जीवन में जो सुख की आशा करते हो
संभव नहीं हुआ है अब तक क्यों इस भ्रम में पडते हो
कर्म प्रधान तेरा यह जीवन कर्म अगर तुम करते हो
मिल जाएगा सब जीवन में क्यों व्यर्थ मे चिंता करते हो
सबके जीवन की सार्थकता कर्मों पर निर्भर करती है
कर्म ही बनता जीवन का रस आनंद दिलों में भर्ती है

गिरिराज पांडे
वीरमऊ
प्रतापगढ़

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