साहित्य

” मेरे प्यारे गुरु जी “


प्रतिभा दुबे

करती हूं मैं नमन अपने समस्त गुरुवरों का
देकर समय जिन्होंने मूल्यवान हमें बनाया है।।

छोटी सी पौध थे हम , एक वृक्ष हमें बनाया है,
सीचा हमको अपने ज्ञान से, हमें ज्ञानी बनाया है।।

हर पल हर क्षेत्र में गुरुवर ने ,उचित मार्ग दिखाया है
कड़ी धूप में भी परिश्रम हमको करना सिखाया है।

मिट्टी की कच्ची गुल्लक तो अक्सर टूट जाति है ,
धन्य है वह गुरुवर जिन्होंने हमें तपना सिखाया है।।

करती हूं मैं वंदना अपने समस्त गुरुवरो की ,
रामकृष्ण जैसा जिन्होंने हमें साहसी बनाया है ।।

भूल कर के जिन्होंने अपने जीवन का हर मनोरथ
बनकर के ज्ञान कुंजी हमकों हर पाठ पढ़ाया है ।।

कोटि-कोटि नमन करूं मैं उस परब्रह्म के अंश को मार्गदश्क के रूप में सद्गुरु ने हमें समर्पण सिखाया है ।।

ज्ञान रूपी कलश से अपने सिंचित किया हमें
शिक्षा दी जिन्होंने हमको,हमें शिक्षित बनाया है ।।

तप तप के तपस्या की है, कुंदन हमें बनाया
माता पिता की भांति , जीना हमको सिखाया ।।

अमूल्य से कंकड़ पत्थर हम, पड़े थे धरा पर कभी
ज्ञान की हथौड़ी से तराशकर मूल्यवान बनाया है।।

नमन बारंबार करूं, करूं मैं चरण वंदना
आचरण के धनी हैं हम,उन्हीं के हम ऋणी है।।

गुरुवर की दी है शिक्षा , हमें काबिल बनाया है
यह जीवन बहुमूल्य है , हमें कर्मठ बनाया है ।।

प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
मध्य प्रदेश (ग्वालियर)

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!