साहित्य

नहीं भूला पाऊंगा मैं

ऋषि तिवारी ” ज्योति “

नहीं भूला पाऊंगा मैं,
उस सीता सति कहानी को,
नहीं भूला पाऊंगा मैं,
उस झांसी वाली रानी को,
नहीं भूला पाऊंगा मैं,
बलिदान शिवाजी राणा का,
नहीं भूला पाऊंगा मैं,
खलिहान कुंवर सिंह नाना का,
नहीं भूला पाऊंगा मैं,
ठाकुर रौशन के फांसी को,
भूल मैं कैसे जाऊंगा,
आजाद भगत अविनाशी को ।

जिन वीरों ने सर्वस्व लुटाई,
उनको मेरा प्रणाम है,
जहां राम ने जन्म लिया था,
वहीं ये हिन्दुस्तान है,
कैसे कैसे दुःख झेले थे,
लोग हमारे बस्ती के,
कारण कोई और नहीं,
कुछ लोग थे मेरे कश्ती के,
कुछ प्राण त्याग कर बचा लिए,
मझधार से अपनी बस्ती को,
कुछ हंसते हंसते गंवा दिए,
सरेआम स्वयं की हस्ती को ।

ऋषि तिवारी ” ज्योति “
चकरी , दरौली, सिवान (बिहार)

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