साहित्य

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांम्बर की कलम से

धारा तीन सौ सत्तर—

एक राष्ट्र दो संविधान
कैसे संभव भारत का
कश्मीर अभिभाज्य अंग।।
स्वार्थी और गद्दारों की
कुटिल चाल ,गुलाम
विकृति मानसिकता भारत के कश्मीर
वेदना का इस्लाम ।।
प्रतिदिन पत्थर बाजी करते नौजवान घांटी जैस इस्लामी आतंकीआतंकवाद
जन्म स्थान सन इकहत्तर में भाषा से
बंट गया दो देशों में पाकिस्तान।।
अपनी साजिश कुटिता से शुरू
किया छद्म युद्ध आतंकवाद हथियार
आतंक बाद की मानसिकता का
इस्लाम करता कुरान का बेजा इस्तेमाल।।
भारत में भी कम नही कुछ आस्तीन में छुपे सांप भारत ने मान दिया पहचान दिया इज़्ज़त शोहरत सारे अरमान दिया फिर भी कश्मीर के भोले भाली
जनता की बलि चढ़ाते जय जय
इस्लाम।।
धोखे और मक्कारी के कई तौर तरीके आयाम कभी बम बारूद धमाकों से तबाही का करते एलान।।
पराजित हुए ना जाने कितनी बार फिर भी कारगिल में कर डाला नापाक इरादों का संग्राम।।
कश्मीरी पंडित को घर से बेघर कर डाला इज़्ज़त आबरू रौंदा धन संपत्ति कब्जा कर कश्मीरी पंडित को अपने ही घर राष्ट्र में शरणार्थी बना डाला।।
कश्मीरी पंडित कश्मीर कीसंस्कृति सांस्कार कश्मीरियत की पहचान शान।। भारत की मर्यादा आस्था का मान
कुछ ना बोला पी गया जहर सा
अपमान जैसे शंकर का विषपान।।
भारत जब सन सैंतालीस मेंआज़ाद हुआ कश्मीर भारत का अंग अविभाज्य हुआ
भूल हुई धारा तीन सौ सत्तर अपनी
ही भूलों से एक हिंदुस्तान एक राष्ट्र
दो संविधान हुआ।।
अन्याय अत्याचार की उम्र बहुत लंबी नही होती खुदा भगवन भी कश्मीर में
शर्मसार हुआ।।
नारायण कहो या ख़ुदा,
जीजस ,जानो या पैगम्बर
नर में नारायनः नर में नरेंद्र का
प्रादुर्भाव हुआ।।
कहते है ईश्वर घट घट में वासी
ईश्वर नर रूप में अवतारी
नर नरेंद्र मानव सत्ता में खुदा
जीजस भगवान ने स्वयं अवतार
हुआ।।
जन्म ही जिसका भारत से हिंदुस्तान
बने राष्ट्र की गौरव गरिमा का महायज्ञ
कठिन चुनौतिया स्वीकार किया।।
गद्दारों के नापाक इरादे दंम्भ भरते
धारा तीन सौ सत्तर गर समाप्त हुआ
खून की नदियां बह जाएंगी यदि मात्र
प्रयास हुआ।।
नर नारायनः साक्षात नर नरेंद्र
शाह अमित भारत के कौटिल्य
चाणक्य की साहस शक्ति धारा
तीन सौ सत्तर आर्टीकल पैंतीस
समाप्त हुआ।।
कश्मीर पुनः जकड़ी जंजीरों
गद्दारों के मकड़ जाल से आजाद
हुआ ।।

ना कोई रक्त पात ना ही शोर
शराबा शांत शौम्य राष्ट्र भारत ने
अपनी आतीत की भूलो का क्या
शानदार सुधार किया।।

नमन तुम्हे है राष्ट्र के नायक
साहस शक्ति दृढ़ता से माँ
भारती की मर्यादा कश्मीर से
माँ भारती का सृंगार किया।।

नारी मर्यादा का महानायक

बेटी नारी औरत समाज
राष्ट्र की मर्यादा गौरव
विकास बैभव की आधार।।
सक्षम बेटी नारी अभिमान
शिक्षित बेटी सक्षम राष्ट्र समाज
स्वाभिमान।।
गौरवशाली नारी औरत
आधी आबादी संसार नारी की अस्मत इज़्ज़त शक्तिशाली समाज राष्ट्र।।
पुरुष नारी सृष्टि के कर्णधार द्विपद सार्वभौमिक ब्रह्मांड नारी व्यवसाय विषय वस्तु नहीँ नारी संबंधों की जननी जन्म जीवन की सांचार।।
नारी की महिमा मर्यादा पर तीन तलाक कलंक अपमान तीन बार के शब्द तलाक तलाक।।
तलाक नारी के जीवन का अभिशाप
शर्म हलाला पुरुष प्रधान समाज
की दवनता रीति रिवाज।।
कुरान औरत की मर्यादा महिमा के आयत और फरमान शरीयत कुरान की मर्यादा को करता तार तार ।।
शाहबानो हिम्मत औरत अस्मत जंग का इतिहास जाने कैसे पलट गयी जीत नारी गौरव की जंग फतेह इतिहास।।
इस्लाम मे औरत क़ायनात
बुनियाद स्वीकार शरीयत
पैतरों तीन तलाक हलाला की
शिकार।।
जब जब माँ भारती करती
पुकार आता मानव ही खुदा
पैगम्बर या स्वय ईश्वर अवतार।।
समाज की क्रंदन वेदना से
मुक्ति का महानायक नारी
बेटी की मर्यादा का महापुरुष
रचने स्वर्णिम वर्तमान।।
योगियों का योगेश्वर बचाने
नारी की लाज दामोदर का
वंश नर नरेंद्र नारी मर्यादा का
मान।।
तोड़ दी जंजीरे तीन तलाक
खत्म हुई नारी की सिसकी
अन्तर्मन की कराह।।
टूट गयी शरीयत की झूठी
शान सर अभिमान से उठ गया
दुनियां बोली सच्ची कुरान की
आयतों का पालन हार ।।

ईमान इस्लाम की जय जय कार का
ईश्वर खुदा नर में नरेंद इंसान इंसानियत ईमान।।
मुक्ति हुए नारी ,नारी गौरव इस्लाम, इस्लाम की परिभाषा का नायब नायाब नर में नरेंद्र युग पुरुष मानव में भगवान।।

मंगल पांडेय भारत का अभिमान

युवा चेतना की ललकार माँ भारती की पुकार राष्ट्र जगृति का शंखनाद
युवा ओज की जय जय कार।।
बागी बलिया का लाल जनपद बलिया
उत्तर प्रदेश का नगवा गांव गुलामी की जंजीरों का प्रतिकार दिवाकर पांडेय
की संतान मंगल पांडेय नाम।।
ऊँन्नीस जुलाई सन ऊँन्नीस सौ सत्ताईस जन्मा माँ भारती की वेदना
गर्जना का लाल ईस्ट इंडिया कम्पनी सेना का सिपाही ह्रदय आज़ादी
की ज्वाला अंगार।।
कारतूस पर चर्वी से उठ खड़ा विवाद
मंगल पांडेय का आगाज़ नही तोड़ेगा चर्वी के कारतूस कोई जवान।।
गोरा अड़ गया उसको दंम्भ देंखे कैसे नही सिपाही कारतूस का करते इस्तेमाल।।
मंगल पांडेय ने किया इनकार गोरों का दमन प्रतिकार मंगल पांडेय ने भरी हुंकार दिया दंड गोरों को गिरने लगी
लाश पर लाश।।
एक एक करके तीन गोरों को मंगल पांडेय ने दिखा दिया कब्रिस्तान
बौखलाहट में अंग्रेजों ने मंगल को बंदी करने हुक्म फरमान ।।

माँ भारती के बीर सपूतों ने मंगल को पकड़ने से किया इनकार अंग्रेजी टुकड़ी ने मंगल को घेर किया ग्रीफत्तार।।
बंदी मंगल पर न्याय न्यायालय की
चाबुक की मार सज़ा हुई फांसी की मंगल को नही कोई मलाल।।
फांसी का फंदा जैसे माँ भारती
की सेवा सौगात माँ की चरणों
का आशीर्वाद।।
बीरों की धरती युवा ओज बलिदानी
धरती बागी बलिया बीरों की बलिया
मंगल पांडेय के आदर्श त्याग बलिदानों
का अभिमान।।
जब रहेगा युग ब्रह्मांड बलिया का
शेर युवा तेज के बलिदानों की प्रातः
सांध्य दिवस निशा का सूरज चाँद।।
स्थूल भाव मे भले नही जिंदा जन
जन मन मे राष्ट्र का इतिहास वर्तमान
मंगल पांडेय प्रेरक प्रेरणा युवा उत्क्रर्ष
अभिमान।।

बेरोजगारी की समस्या

बेरोजगारी एक समस्या जिसका
नही कोई निदान ।।।

सिर्फ जन जन जागरण ही बेरोजगारी महामारी का हल निदान।।

शिक्षा के मंदिर बन गए व्यवसाय
शिक्षा केवल पैसे वालो को गाँधी
की बेसिक शिक्षा नीति बेकार।।

मैकाले ने खेला खेल भारत का
नौजवान नौकर बनकर ग़ुलाम
परम्परा का रहे पर्याय।।

कान्वेंट संस्कृति सांस्कार ने
कर दिया बंटाधार बेरोजगारी
बेरोजगार हिंन्दुस्तान ।।।

समस्या नही कोई समाधान
नौजवान लड़ता जीवन संग्राम।।

बचपन किशोर युवा शिक्षा दीक्षा
कठिन परीक्षा प्रतियोगिता प्रतिस्पर्धा की मार।।

अच्छे विद्यालय, अच्छी शिक्षा
आवश्यक आवश्यकता दरकार।।

माँ बाप की आर्थिक स्तिथि चाहे हो
जो भी करते सारे प्रायास।।

जो भी हो कुलदीपक की बेहतर
शिक्षा दीक्षा पर सब कुछ न्यवछावर
करते बस एक विश्वास।।

पढ़ लिख कर बेटा कुल गौरव
मान बेटे भी माँ बाप की अभिलाषा
विश्वास पर मर मिटते खरे उतरने की
खातिर करते सारे प्रयत्न प्रायास।।
पढ़ लिख कर फिर लड़ते रोजी रोटी
रोजगार का संग्राम ।।।

रोजगार निश्चय मिले सरकार का आश्वासन नौजवान आस्था विश्वास।।

डिग्री के बंडल लेकर रोजगार की
खबरे पढ़ता दिन रात।।

आवेदन करता रोजगार अवसर सीमित आवेदक की भरमार।।

रोजगार की तलाश में बेरोजगार
नौजवान बूढ़ा सा दिखने लगता
हताश निराश नौजवान ।।।

नौकरी की मारा मारी भविष्य के भय भ्रम संसय जीना मजबूरी की मार।।

खोजता स्वरोजगार बाधाओं अनेक सीमित संसाधन की मार।।

बेवस विवश लाचार दर दर की
ठोकर खाता नौजवान।।।

सरकार भाग्य भगवान कोषता समय वक्त काल का विद्रोही राष्ट्र भविष्य का नौजवान।।
माँ बाप की आशाओं की आंखे
पथराई खोजती कुलदीपक की
पैदाईस की खुशियों का यथार्थ।।

माँ बाप लाचार बेटा करता हर
सम्भव ईमानदार प्रायास ।।।

लेकिन प्रतियोगी प्रतिस्पर्धी जीवन मे
कही घालमेल से घायल मन मे
प्रतिघर्षन की अग्नि आँगर।।

सच्चाई आदर्श शिक्षा दीक्षा का
कर देता त्याग चाहे जैसे भी हो
आय चल पड़ता अंतर्मन की वेदना
लिये साथ।।

रोजगार में बाधक बढ़ती
जनसंख्या क्या करे सरकार
सीमित संसाधन बेरोजगारो
की भरमार।।
नौजवान अपराध की दुनियां में कदम रखते आतंक खौफ का पर्याय।।

बेरोजगारी बेरोजगार जैसे
महामारी ना कोई टिका ना
कोई सांस्कार व्यवहार मास्क।।

नहीं चुप रख सकती दूरी मजबूरी जिंदगी मौत से निर्भय प्रतिदिन बेरोजगारी की बीमारी से लड़ता जीवन संग्राम बेरोजगार नौजवान।।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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