साहित्य

नीलम राकेश की कलम से

एहसास

चाहत है
मिलन की
रात होने दीजिए।

सूख रहा
है पनघट
बरसात होने दीजिए।

प्यार गर
है बेपनाह
मुलाकात होने दीजिए।

प्यार का
हमें अपने
एहसास होने दीजिए।

सद्बुद्धि का उपहार

वृक्ष
धरती का हैं
अनुपम उपहार ।
क्यों
हो रहा है
तेरा संहार ?

जिसके लिए
कर रहे तुम
प्राण वायु संचार,
वही
चाहता है करना
तेरा संहार ।

देते
जिसको तुम
जीवन का उपहार,
वही
चाहता है करना
तुझपर प्रहार ।

हे ईष,
करो तुम
सद्बुद्धि का संचार ।
देदो
मानव को
सद्बुद्धि का उपहार ।

नीलम राकेश
लखनऊ

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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