साहित्य

पत्थर में भगवान

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांम्बर

भ्रम संसय अंहकार
अंधकार के टकराव
कदम कदम जोखिम
खतरे फिर भी आस्था
और विश्वाश जीवन आधार।।
ज्ञान विज्ञान छोड़ते साथ
ध्येय ध्यान मार्ग साध्य साधना
आस्था और विश्वास।।
रिश्ता समाज का आधार
टूटे भाँवो को जोड़ता
अस्तित्व आविष्कार व्यवहार
आस्था और विश्वास।।
आस्था अस्तित्व
बाल्यकाल वातावरण
परिस्थितियों का प्रभाव
विश्वास अंतर्मन की स्वीकृति
स्वीकार।।
आस्था और विश्वास
हृदयतल गहराई के प्रवाह
प्रेम करुणा क्षमा सेवा
जागृत भाव ।।
मरुस्थल में भी गंगा
धाराओं के निर्मल निर्झर
कलरव प्रबाह आस्था ऊर्जा
साहस अभिव्यकि शक्ति सार।।
आस्था आत्मीय अवस्था
याथार्त आशा और निराशा
प्रतिघर्षन प्रतिध्वनि विश्वाश
प्राण के धड़कन स्वांस
आस्था और आधार।।
आस्था पत्थर पर खिंचती
लकीरें पत्थर में भाग्य भगवान
प्रत्यक्ष प्रमाण विश्वाश नेत्र
हृदय में नर नारायण अवतार।।
बालक प्रह्लाद की आस्था
खंभे में नरसिंघ भगवान
ध्रुव आस्था का आसमान
हिलने लगा ब्रह्मांड आये
स्वयं बासुदेव भगवान।।
सम्भव नही शब्दो मे बांध
सके कोई आस्था और विश्वास
अलग अलग अन्तर्मन से
उपज पुंज प्रकाश।।।

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांम्बर
गोरखपुर उत्तर प्रदेश

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