साहित्य

फूलों सा मुस्काता चल

पूनम शर्मा स्नेहिल


गीत खुशी के गाता चल,
दर्द को अपनी भुलाता चल ।
क्या रखा यादों की गलियों में ,
तू हर पल बस मुस्काता चल ।

खुशियों के वो फूल खिला,
मायूसी में महकाता चल।
टूट बिखर जाए चाहें पर ,
अपनी खुश्बू तू फैलाता चल।

रहना अंधेरों में पूनम पर ,
चांद सी राह दिखाता चल।
अंधेरी रातों में दीया बन
जग को रोशन कर जाता चल।

बन मेंहदी सी इस जीवन में ,
अपनी रंगत फैलाती चल।
टूट बिखर जाए चाहे पर ,
खुश्बु-रंगत खुशियांँ लुटाती चल।

भुला के सारे रंजोगम ,
फूलों सी मुस्काती चल।
बन अंधेरे का दिया सी ,
खुशियांँ सब पर लुटाती चल।।

©️®️☯️

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!