साहित्य

पुस्तक समीक्षा : विलोल वीचि वल्लरी


विचार प्रधान रचनाएं संजोएं हैं विलोल वीचि वल्लरी

  • समीक्षक :डॉ.अनिल शर्मा अनिल
  • रचनाकार : पल्लवी मिश्रा

कविताएं मेरे होने और न हो पाने के अनगिनत अभिलेखों पर एक सुनिश्चित हस्ताक्षर हैं।
यह पंक्ति पल्लवी मिश्रा के काव्य संकलन, विलोल वीचि वल्लरी के प्रथम पृष्ठों में प्रकाशित है,जो इस संकलन की कविताओं के महत्त्व को प्रदर्शित करती है।
विलोल वीचि वल्लरी काव्य संकलन में संकलित 69 कविताएं, पल्लवी मिश्रा की वैचारिक प्रखरता, बहुआयामी चिंतन और
भाव अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इसमें संकलित समस्त कविताएं पल्लवी के विचारों और चिंतन की ऐसी प्रवा‌हित सरिता है,जो पाठक को सहज ही अपने साथ बहा ले जाती है।
यद्यपि ये कविताएं छंद मुक्त शैली में है,जिसे आमतौर पर नीरस ही माना जाता है। लेकिन
इन कविताओं में एक ऐसी गति और वैचारिक प्रखरता है जो पाठक को बांधे रखती है।
इन कविताओं के शीर्षक ही स्वयं में बहुत प्रभावी है, मेरे जैसे लोग, पन्नों पर कलम, प्रार्थनाएं,नन्दी जैसी भक्ति,विदाई,गंगा,देव दीवाली,निष्प्राण यमुना, हिमालय का दर्प, देवस्थान सा देवदारु,प्रकृति के संस्कार गीत,मोहन जोदारो,मेघ गृहस्थन,सप्तर्षि, सर्द मौसम, धरती का प्रेम, रेलगाड़ी भी ले जाइए हुजूर,तुम्हारी कुटिल मुस्कुराहटें, कंपनी बाग का जामुन,बरगद सा ये देश, इतिहास का बेताल, तुम्हारे स्याह तर्क,शहीद,लिखा गया शहीद,देह है देश,पास कैसे ग्रे मध्यवर्गीय, कामाख्या, अयोध्या,राम,तुम आओगे न कृष्ण,सदी का वियोग,एक टुकड़ा वक्त,रुके वक्त की दृढ़ निशानियां,अन्न साधती अन्नपूर्णा, मालिनी थान का गल्प,सतियों का सत,शब्द मेरे,शब्द जंग खा गए, हथियार होती चुप्पी, शरणार्थी,संध्या का आकाश,प्रेम गंभीर व चुप,प्रेम के विधान,प्रकाश पुंज से लड़के, दिशा बनो लड़कियों,पारस पुरुष,व्यर्थ न जाए आराधना,जीवन के खगोल पर,पीली कनेर सी लड़कियां, रंगोली के रंग,कशिश, तथास्तु से शब्द,प्रेम कापालिक,पलाश का विद्रोही प्रेम,कोई माला,सुभद्रा शरण,गोलपी,हम सती भी डायन भी, विभूति जिनके कृतज्ञ हैं हम, गिरहें,व्यर्थ न जाएं आराधना, प्रतिध्वनियां,उन कामरेड्स को,रेल की खिड़की से,क्षय,मृत्युदाह,नदी,अनवरत।

पल्लवी मिश्रा की भाषा शैली में सहजता,सरलता और सरसता का अद्भुत सामंजस्य है। उनकी भाषा में बनावट और बुनावट नहीं,जो उलझाव पैदा करें। अपनी बात को सीधे सीधे पाठकों के सामने रखना, बिना किसी लाग लपेट के,इसकी विशेषता है।
इस संदर्भ में कुछ कविताओं के अंश देखिए **ज्यादा करीब न आओ, रुपहले चांद/आसान नहीं,धरती सा होना,प्रेम में भी/धरती का निर्विकार प्रेम,धुन है,धुरी है,ध्यान है/जीवन का उन्माद है/तुम ही हो नहीं सकती धरती/धरती मात्र कला नहीं, कल्पना नहीं/अंतरिक्ष का, संस्कार है।
(धरती का प्रेम, कविता का अंश)

**मैंने कभी नहीं चाहा, झाड़ना,पोंछा/यादों की गठरी में बंद/पीतल कांसे चांदी की पुरानी मूर्तियों को/बीती यादें काठ,ताम्र लोहे सी/सीलन भरी कोठरी में बंद/जिस पर चढ़ा दी है सांकल/ओढ़ ली है भुलावे की चादर/ गिरहें खोलूं तो दर्द से बिलबिला उठता है वक्त/उससे रिसते घाव फिर फिर बांधती हूं पट्टियां/छुपाती हूं उन ज़ख़्मो को, सबसे, खुद से।
(गिरहें,कविता का अंश)

**प्रेम कापालिक कितना उन्मुक्त,कितना रत/निर्बाध आखेटक,तप विरक्त,भस्म,रक्त,चर्म के नाम मार्ग पर/प्रेम कापालिक कर चुका है हत्याएं,हर सात्त्विक मर्म की/असमर्थ प्रेम कापालिक, खंडित कल्पना लोक पर/न गढ़ पाता है त्रिपुर सुंदरी की मूर्तियां/न पहनाता है उन्हें जपा कुसुम की माला/अस्थिर,प्रेम कापालिक ढूंढ़ता है प्रश्रय, विखंडित विन्यासों में।
(प्रेम कापालिक, कविता से)

**हथेली पर पारे सा प्यार/उमगाएं रखती लड़कियां/संघर्ष शील दीवारों की कैद को,अर्थ दिए जाती हैं/अलंघ्य आदर्शों के आयाम/बिजली की कौंध सा पर्याय, बादलों में छुपाए, बारिश सी लड़कियां/जब मेंढ़ों, तालाबों की ठौर जा रही है तब/शब्द या संकेत भर न रहकर, पानी और आंसू सा, यथार्थ हुआ जाता है प्यार।
(पीली कनेर सी लड़कियां, कविता का अंश)

**अपने आंचल के कोरों पर/बूंदों को कसकर बांध,डाल दिया है पीठ पर/और करती है जतन भूल जाने का उन्हें/तभी बरसते नहीं ये बादल/मेघ गृहस्थन बन/डोलती है भर आकाश/करती जाती है अनदेखी,मनपसंद फुहारों की/और बरसते नहीं बारिशों के गुच्छे।
(मेघ गृहस्थन, कविता का अंश)
इन उदाहरणों से आप संकलन की कविताओं के तेवर का सहज अनुमान लगा सकते हैं। कुछ नये बिंव भी इन कविताओं में मिलते हैं।
देवभूमि विचार मंच प्रकाशन, देहरादून से प्रकाशित इस संकलन को कर्मभूमि देवभूमि को समर्पित किया गया है।
कुल मिलाकर विलोल वीचि वल्लरी संकलन एक ऐसा संकलन है,जिसको पढ़ते हुए पाठक विभिन्न भावभूमि की मानसिक यात्रा करते हुए एक बार स्वयं को भूल जाता है और खुद को इन कविताओं का पात्र होने का अहसास होने लगता है।पल्लवी मिश्रा को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई।
डॉ अनिल शर्मा अनिल
धामपुर उत्तर प्रदेश

100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!