साहित्य

रंजना कुमारी वैष्णव की कलम से

श्यामपट्ट का महत्व

अक्सर कहते सुना है कि अच्छाई और बुराई का कभी मिलन नही हो सकता तो आप सबका ध्यान बंटोरना चाहुंँगी कि…
अगर सफेद रंग अच्छाई को दिखलाता
काला रंग बुराई का है माना जाता,
पर देखा मैंने दोनों रंगो का जो मेल
सब बाते लगने लगी अब भेल ,
कहने को है श्यामपट्ट की दुनिया काली
पर सफेद अक्षरों से बन जाती है एक छवि निराली,
इस पट्ट पर लिखने वाला होता है गुरू जहान
जो इसे पढ लेता बन जाता अर्जुन महान,
विषयों मे मच जाती है होड़, श्यामपट्ट पर पहले आये कौन?
बारी-बारी अपना प्रभाव दिखाए,पर गणित से जो न डरे ऐसा कौन?
कोई लिखता कोई मिटाता, दे जाता है एक नया ज्ञान
हर बालक यूं तर जाता, सुनकर इसका गहन गान,
शिक्षक की है ये कर्म -भूमि, जहाँ विषयों का खेल दिखलाता
मूर्ख भी बना कालीदास, यह सीख हमें श्यामपट्ट सिखलाता ।

मन्नत का धागा

तेरे रंग मे ऐसी रंगी
न दूसरा रंग लागा
कुछ ऐसा बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा

एकदूसरे संग ऐसे है हम
तु चकोर मैं राका
कुछ ऐसा बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा

तेरा मिलन निश्छल प्रेम सा
इससे बढकर कुछ न मांगा
कुछ ऐसा बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा

तेरा प्रेम लगता मुझे
तु तन मैं गाबा
कुछ ऐसा बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा

सम्मुख प्रिय छवि देख
सोया मन जागा
कुछ ऐसा बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा

नित -नित पाकर दर्श मेरा
हाय! क्यूं ऊब दूर भागा
शायद इस बार नहीं बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा

आभासी प्रेम लुभाया तुझको
वास्तविकता बनी अभागा
शायद इस बार नहीं बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा

सुन बावरे! तेरे आने की आस में
द्रवित हृदय रातभर जागा
लो आज फिर बाँधा मैंने, मन्नत का वो धागा।

अधूरे पल का यादगार लम्हा

उस शाम का रंगीन नजारा याद रहेगा ,
वो पतंग लूटने के बहाने गलियों में घूमना याद रहेगा ,
जो आँखों से इशारे होते थे इधर ,
वो बेवजह शर्माकर छिप जाना याद रहेगा।

प्यार का पैगाम लेने के लिए किताबें कक्षा मे भूल जाना याद रहेगा,
पढने के बहाने किताब की ओठ मे खत लिखने का वो पल याद रहेगा,
जो बैचेनी भरा इन्तजार होता था इधर,
वो बेवजह मुस्कुराकर भाग जाना याद रहेगा।

मिलने की उमंग में ख्याली पुलाव बनाना याद रहेगा,
मंदिर जाने के बहाने एकदूसरे का दीदार करना याद रहेगा,
जो परिक्रमा के दौरान हाथ पकड़ते थे इधर,
वो बेवजह धड़कनें बढने पर हाथ छुड़ाना याद रहेगा।

उस दौर में घंटो तक आईने मे खुद को संवारना याद रहेगा,
गुनगुनाने के बहाने “दिल तो पागल है” गाना सुनाना याद रहेगा,
जो “अजय देवगन” की तरह प्यार भरी आँखों से देखते थे इधर,
वो बेवजह अन्ताक्षरी खेलने पर दिल की बात कह जाना याद रहेगा।

आज भी याद करते है तेरी हसीन यादों का वो पल,
हाँ! आज भी मोहब्बत का आलम है कि आगे भी यादगार लम्हा याद रहेगा, हाँ याद रहेगा।

बहुत याद आती हैं

वो क्लाशरूम की मस्ती
वो बारिश में कागज की कश्ती
वो दोस्तों की यारी
बहुत याद आती हैं।

वो चॉक की चोरी
वो बैग इतना भारी
वो डस्टर की मारा-मारी
बहुत याद आती हैं।

वो प्रार्थना की आँख-मिचौली
वो लास्ट बैंच पर बैठने की लौरी
वो कक्षा, टिफिन की खुशबू से भरी
बहुत याद आती हैं।

वो मेम की जगह सर को चुनने की बारी
वो गणित की दबंगदारी
वो हिंदी की होशियारी
बहुत याद आती हैं।

वो खुद की मोनिटर-गारी
वो बेस्ट दोस्ती का प्रमाण -पत्र जारी
वो ब्लेक-बोर्ड पर नाम लिखने की बारी
बहुत याद आती हैं।

वो दो रुपये की उधारी
वो घर जाने के बहाने,बताना पेटदर्द भारी
वो अधूरे होमवर्क पर कान पकड़ कर सॉरी
बहुत याद आती हैं।

रंजना कुमारी वैष्णव

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