साहित्य

रितुराज बसन्त

रमेश कुमार द्विवेदी, चंचल

रितुराज बसन्त कबैका गये मुल आई कहाँ रितुराजनु रानी।।

निरखतु परखतु नैन थके ललचावै की खातिनु जूनै देखानी।।

लागतु जूनै ही काली घटा यै किसानै लगाय दिहेनु अगवानी।।।

भाखत चंचल धान झुरात देखात कतौ नहि बरखा ई रानी।।1।।

मँहगाई बढी़ औ बढा़ ई कोरोना घरौ मा कै गोहूँ सेवारि गिरानी।।

गायब गोहूँ भवा ई लगावै मा खेतन खेतन दर्रा देखानी।।।

बेरनु जौनु किसानु रहीं कछू दीन्ह लगाय औ कौनौ पियरानी।।

अबु भाखत चंचल गोहूँ गवा अरू धानौ गये मुल आईं ना रानी।।2।।

आवा तू रानी ई गाँव हमारे तौ सेवा अऊर सत्कार करूँगी।।।

लरिकनु खेलिहँय काल कलौटी या नारिनु आजु हलानु धरूँगी।।

सिगरी जतनु कयके हारि गयौं मुल काली घटानु कहीनु भरूँगी।।।

भाखत चंचल नयनु थकें बिसराय गलीनु ना ठौरू भरूँगी।।3।।।

नहरौ ना पानी देखानु कतौ नहि डीजल भाव कै मूँड गिरानी।।

पानी नहर जस नीचे गवा वस ऊँच चढ़यौ यहौ डीजलु बानी।।

कोपि गयीं अजौ बरखा सयानी औ कौनि तिना हौं लाई विधानी।।

अबु भाखतु चंचल आवा तू बरखा परखतु परखतु देंह झुरानी।।4।।

आशुकवि रमेश कुमार द्विवेदी, चंचल

। ओमनगर,सुलतानपुर, उलरा,चन्दौकी,

अमेठी, उ.प्र.। मोबाइल….8853521398,9125519009।।

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!