साहित्य

रिश्ते

नीलम राकेश

रिश्तों
का बीज
बोना
जो कभी तुम,
प्यार
से सींचना उसे ।

क्योंकि
रिश्ते
अंकुरित होते हैं,
दिल
की भूमि पर,
संवेदना
के खाद और
प्यार
के पानी से ।

पुष्पित, पल्लवित
करना
स्नेह से ।
बनेगा
मजबूत वृक्ष वह,
और देगा
तुम्हें शीतलता
आजीवन ।

नीलम राकेश
लखनऊ

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