साहित्य

साहित्य परिचय : डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय

परिचय : डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय

जन्म तिथी : १ नवम्बर, मिर्ज़ापुर (उत्तर प्रदेश) ।

शिक्षा : एम. ए. (हिंदी साहित्य, राजनीति शास्त्र), पी. एच. डी – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
बी.एड – मुंबई वि. वि
ध्यान प्रशिक्षिका- महर्षि अंतराष्ट्रीय वि. वि, नॉएडा ।

कार्य अनुभव : प्रवक्ता, अकबर पीरभोय महाविद्यालय संबद्ध मुंबई विश्वविद्यालय,
विभागाध्यक्ष- हिंदी विभाग ।

प्रकाशन एवं प्रसारण : कविताओं, कहानियों एवं अन्य रचनाओं का पत्र पत्रिकाओँ में सत्त प्रकाशन ।

प्रकाशन : साझा संकलन: मुंबई की हिंदी कवयित्रियाँ,
सीप के मोती, काव्यप्रवाहिनी, अनुभव: कहानी संग्रह, काव्यधारा, काव्यतारंगिणी, मासूम सपने, भारत की सर्वश्रेष्ठ कवयित्रियाँ ।
एकल संकलन: एक थी गौरी, अंतरमन के द्वार, उस मीरा से इस मीरा तक- काव्यांजलि, मन के आर- पार ।
एवं आकाशवाणी वाराणसी, इलाहाबाद, और मुंबई से प्रसारित कविताएँ ।
महाराष्ट्र साहित्य अकादमी में काव्य पाठ ।
राष्ट्रीय- अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर काव्य पाठ ।

सम्मान : महाराष्ट रामलीला उत्सव समिति, मुंबई- सम्मान पुरस्कार
अग्निशिखा साहित्य गौरव सम्मान, मुंबई ।
मुंबई वि वि प्रायोजित अन्तर्राष्ट्रीय रामायण सम्मलेन, सहभागिता एवं सम्मान ।
विश्व हिंदी लेखिका मंच दिल्ली, सम्मान पत्र ।
विश्व हिंदी रचनाकार मंच दिल्ली, सम्मान पत्र ।
हिंदी सागर दिल्ली, कविता प्रकाशित ।
सेतु जर्नल पीटर्सबर्ग अमेरिका, कविता प्रकाशित ।
पुस्तक भारती कनाडा, कविता प्रकाशित ।
श्री राम एक्सप्रेस ग्वालियर, कविता प्रकाशित ।
काव्य रंगोली उ.प्र, कविता प्रकाशित ।
अमर उजाला, कविता प्रकाशित ।
जीवन प्रभात, कविता प्रकाशित ।
भारत विलक्षणता वाराणसी उ.प्र- वाग्देवी पुरस्कार ।
हिंदी साहित्य अकादमी मुंबई- काव्य पुरस्कार ।
कीर्ति कॉलेज मुंबई, पर्यावरण सुचिता सम्मान ।
पंजाब नेशनल बैंक- हिंदी दिवस सम्मान ।
सेंट जॉन थी बैप्टिस्ट कॉलेज- हिंदी दिवस कार्यक्रम में हिंदी दिवस सम्मान ।
अध्यक्षा- अपराजिता समाज सेवा संस्थान, मिर्ज़ापुर (उ.प्र), विभिन गतिविधियों का क्रियान्वयन..
इत्यादि ।
कोरोना से सम्बंधित रचनाओं, लघुकथाओं का विभिन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन- प्रसारण ।

अंतरदृष्टि,व् भावातीत ध्यान साधना दो आध्यात्मिक पुस्तक
जीवन के रंग,वास्तु के संग। वास्तु की पुस्तक।
सौ साझा संकलन।
35 किताबे अब तक। मेरी दो पंक्तियाँ— – – – – –
मीरा मन की पीर है ।
शब्द – अर्थ की नीर है ।।

मनमाने बात है मीरा ।
पत्थर में दीखता है हीरा ।।

© डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय
मुंबई, महाराष्ट्र

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