साहित्य

सहयोगी बनो

डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”

जगत में ग़लत फ़हमियां
जैसा कुछ नहीं है,
जो जहाँ तक देख पता है
उसको उतना ही दिखाई पड़ता है,
जैसे-जैसे तुम स्वयं में गहरे
उतरते जाते हो,
समझ बढ़ती जाती है,वैसे-वैसे तुम्हारी
दृष्टि दूर तक देख पाने में
सक्षम होती जाती है.

इसका मतलब ग़लत कोई नहीं है
जिसका जितना अनुभव है वो
अपनी जगह सही कह रहा है.

तो किसी को नीचा दिखाने
या ग़लत सिद्ध करने से अच्छा है,
अपनी दृष्टि को गहरा करो,
और दूसरों की दृष्टि का सम्मान करो
और उनकी दृष्टि भी गहरी हो
इसमें सहयोगी बनो…..

डॉ.सारिका ठाकुर “जागृति”
सर्वाधिकार सुरक्षित
ग्वालियर (मध्य प्रदेश)

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