साहित्य

संतोष धन

रेखा रानी

है संतोष परम धन भाई।
सबने बात यह दोहराई।
धन संतोष परम हितकारी।
नासे लोभ हरे व्यभिचारी।
जो जन करता है रसपाना।
बाकी सब धन धूर समाना
सारे सुख हैं इसमें समाए।
जीवन में सन्मार्ग चलाए।
महल संपदा जग बहु पाए।
हृदय मगर संतोष न आए।
वो जन जग में कछु न पाए।
अंत समय में वो पछताए।
रेखा सुख संतोष अनूठा।
बाकी सब कुछ है जग झूठा।
रेखा रानी
विजयनगर गजरौला,
जनपद अमरोहा,
उत्तर प्रदेश।

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