साहित्य

श्रद्धांजलि (भाग-3)

तुलसीदास

वीणागुप्त

श्रीरामचरित मानसरोवर में ,
क्रीड़ा करते सुभग हंस।
चातक रामघनश्याम के,
नित पुलक,नव रुचिर रंग।

आगम, पुराण,उपनिषद के
तुम प्रकांड पंडित महान।
संस्कृत पर वर्चस्व तुम्हारा,
जनभाषा में किया प्रभु गुणगान।

भक्तिकाल की संक्रमण- वेला,
विविध भाँति के हुए विवाद।
तुम लेकर आए समन्वय भावना,
दिया ऐक्य का सुख संवाद।

स्वान्तःसुखाय रचना तुम्हारी,
बरसत सदा वर वारि विचार।
सत्य ,शिव ,सौंदर्य समन्वित ,
बही बन कर गंगा की धार।।

काव्य-कला निष्णात तुम,
भाव-शिल्प का मणिकांचन योग।
उपमा,रूपक,उत्प्रेक्षा यमक ,
सभी का किया सहज प्रयोग।

हिंदी साहित्य-आकाश के , स्वर्णिम नक्षत्र तुम आभामान
शक्ति ,शील ,नीति त्रिवेणी ,
शीतल करती मन और प्राण।

कला अधूरी बिना तुम्हारे,
उजले -काले पात्र उकेरे,
अशिव और असत्य पर तुलसी ,
तेरी कविता जय का गान।।

वीणागुप्त
नई दिल्ली

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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