साहित्य

सावन महीना

दीपमाला_पाण्डेय

हर किसी के लिये सावन
अच्छा नहीं होता
हर किसी का मकान
पक्का नहीं होता
सावन की बूंदों के साथ
अंगड़ाई भरती है जवानी
गरीबों की बस्ती में
भरता है पानी
सावन की हरियाली में
लहलहाते हैं फसल
नदियों की लहरें झूमती
करती हैं कलकल
जहां अमीरों के मकान
बारीश में हैं पकते
वहां मिट्टी के घरौंदे
इसी सावन में है ढहते
किसी के सपने जुड़ते हैं
किसी के अपने बिछडते हैं
न खा पाते हैं पेटभर
न चैन की नींद सोते हैं
क्यों आता है ये सावन उनके घर

दीप*जो पल पल डर से जीते हैं

बारीश की बूंदों से हर
कोई खुश नहीं होता
हर किसी के लिये सावन
अच्छा नहीं होता
छीना है अपनों को मुझसे
उनकी यादों में दिल रोता
हर किसी के लिये सावन
अच्छा नहीं होता ।।।।


दीपमाला_पाण्डेय

रायपुर छग

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