साहित्य

सावनी कजरी

डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय

रिमझिम बरसत् बा हो,सवनवाँ
घरवाँ नाहीं सजनवाँ ना – – – -२

बहे मदमस्त पवनवाँ – – – -२
गोरिया नाचे अँगनवा ना- – -२

घटा छायल घनघोर
मेघ बरसे बड़ी जोर
बिजली तड़के चरों ओर
अब सांसत में बा परनवां
घरवां नाहीं सजनवाँ ना – – – २

बहे मदमस्त पवनवाँ – – – २
घरवां नाहीं सजनवां- – – -२

नाहीं घर सास नाहीं घरे ससुरा
देवरा त् बाय अपने दूअरवाँ
साँसत में बाटय परनवाँ ना… २

रिमझिम बरसत् बा हो सवनवाँ
घरवा नाहीं सजनवा
मन गइल सकाय
नाहीं कउनो उपाय
विरना सगं जइबे नइहरवाँ – – –
रिमझिम बरसत् बा हो सवनवाँ- – – – – २

@ डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय
मुम्बई,महाराष्ट्र, भारत ।

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