साहित्य

सायास्…..मे

डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय

दो मुस्कान हमारे…
दोनों आँखों के तारे…
एक सोनजुही, एक राजनीगंधा…
खिल गए दोनों जीवन में…

जीवन महका, जीवन चहका…
संगीत के सुर- सरगम में…
इनके उर अंतर में…
सजल त्रिवेणी बहती…
कितना प्यार भरा! मैं कैसे कह दूँ?

माँ की ममता इनमें दिखती…
बहन का दिखता सहज स्नेह….
बेटी सी गुन- गुन करती हैं…
सहज सरल है, अनुपम प्यार…

पग- पग पर सिखलाती रहती…
पथ मेरा महकाती रहती…
सायास आ मिली जीवन में, सरिता सी…
एक है संगीत तो एक सरगम है ।

डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय🙏🌺

मुंबई,महाराष्ट्र,भारत।

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