साहित्य

सुख -दुख

कुंदन कुमारी

जीवन में सुख दुख साथ चलते रहते हैं,
सच्चाई है की सुख में सारे लोग साथ रहते हैं,
लेकिन दुख का समय तो कुछ खास होते हैं,
यदि जीवन में कभी दुख नहीं होता,
तो अपना पराया का पहचान नहीं होता,
खुशी और गम से भरी जिंदगी बीतती रहती है,
पर जितनी खुशी होती है किसी को पाने में,
खोने का गम कहीं उससे अधिक होती है,
सम्प्रति बुरा वक्त चल रहा है,
अंधेरा प्रकाश को डसता जा रहा है,
लेकिन जरा सोचिए ……..
रात के बाद यदि दिन नहीं होता,
अंधेरे और उजाले में फर्क कैसे होता ?
कांटे नहीं होते तो पुष्प का सौंदर्य क्या होता ?
पतझड़ नहीं होता तो बसंत का महत्व क्या होता ?
बुरा वक्त जाएगा, अच्छा समय आएगा… . …………..
कुंदन कुमारी
बेगूसराय बिहार

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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