साहित्य

तो कल बहार भी आएगी यारों

जयश्री बिर्मी

कमी है बहुत खुबियां भी बहुत हैं,
सभी में यही गुण भरे हैं यारो।
कमी किसी को दिखी किसी
को दिखा गुण हैं,
उसको वोही दिखा जैसी उस् की तासीर हैं।
जो अच्छा हैं देखेगा अच्छा ही,
बुरे को दिखेगा बुरा ही।
लिखे हैं बहुत फसाने प्यार के शायरो ने,
नफरत के तरन्नुम भी कम नहीं हैं।
प्यार और वफ़ा की लिए है जुस्तजू हर इन्सान,
खुद कौन करता हैं प्यार
और करता है वफ़ा।
गर न करो वफ़ा तो कोई बात नहीं,
पर जफाएं तो न करो यारों
के जज्बातों से।
वक्त वक्त की बात हैं,आज फिज़ा हैं,
तो कल बहार भी आएगी यारों ।
किसी के दिल की दुनियां को उजाड़ने से पहले,
सुन लो अपने ही दिल की आवाज़।

जयश्री बिर्मी
निवृत शिक्षिका
अहमदाबाद

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