साहित्य

उमा सिंह की कलम से

प्रभु उनको भी

प्रभु उनको भी ममता की छांव दे देते
नन्हे -नन्हे पांव जिनके तपती सड़कों पर चलते हैं
ना जमाने की खबर उनको बस दो वक्त की रोटी की गुजारिश करते हैं
प्रभु उनको भी ममता का आंचल दे देते
तन पर जो फटे कपड़े पहने मस्ती में मस्त घूमते हैं बस
पुराने कपड़ों से ही खुश हो जाते हैं जो
प्रभु उनको भी ममता का थोड़ा प्यार -दुलार दे देते
चाहे जितने भी बीमार हो फिर भी मेहनत करते हैं
दवा बिना ही ठीक हो जाते जो दुआ आपकी करते हैं

यह धरती वीर जवानों की

यह धरती वीर जवानों की
अलबेलों का मस्तानों की
शीश ना झुकने दिया जिन्होंने
कर्मनिष्ट भारत के दीवानों की
जहां वीर भगत सिंह ,राजगुरु
हंसते-हंसते बलिदान हुए
यह धरती वीर जवानों की अलबेलों की मस्तानों की
शीशा झुकने दिया जिन्होंने कर्मनिष्ट भारत के दीवाने की
जहां झांसी की रानी लड़ी
अंग्रेजों से अंतिम सांस तक
ऐसी वीरगाथा है भारत की
यह धरती वीर जवानों की अलबेलों की मस्तानों की
शीश न झुकने दिया जिन्होंने
कर्मनिष्ट भारत के दीवानों की
जहां बापू जैसे महापुरुषों ने
सत्याग्रह चलाया और
अहिंसा का पाठ पढ़ाया
यह धरती वीर जवानों की अलबेलों का मस्तानों की
शीश न झुकने दिया जिन्होंने
कर्मनिष्ट भारत के दीवानों की
जहां अंबेडकर जी ने लिखित संविधान रचा
और नेहरु जी ने लोकतंत्र निर्माण किया
यह धरती वीर जवानों की
अलबेलों की मस्तानों की
शीश ना झुकने दिया जिन्होंने कर्मनिष्ट भारत के दीवानों की

            
 उमा सिंह
 झांसी  
             
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