साहित्य

वही क्यों ना लिखूं ?

नीलम राकेश

उधार की कविता
क्यों लिखूं ?
कुछ तो होगा
मेरी कलम में
वही क्यों न लिखूं ?

कविता नहीं उतरती
आकाश से ।
अनुभूति , कल्पना , संवेदना
रचते हैं उसे ।
चलो वही लिखूं।

कविता नहीं है केवल
भावों की अभिव्यक्ति ।
कविता मीरा का प्रेम है ,
कबीर की वाणी है ,
तेरी मेरी कहानी है ।

वही क्यों न लिखूं ?

नीलम राकेश
लखनऊ

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