साहित्य

विचार

रमेश कुमार द्विवेदी, चंचल

नीकु विचारू उठय जौ हिया तौ मानव इहय यती योगी कहाई।।

मोक्षहू पावै खातिन ई मानव जंगल जंगल खोहनु धाई।।

मातु पितानु विचारू ही जानि कुमार श्रवण काँधै काँवरि लाई।।

भाखत चंचल कोशलाधीशु यहय पितुबैन मा जंगलु जाई।।1।।

नीकु विचारू हिया जौ उठा तौ पुरखनु सम्पत्ति चरननु लाई।।

द्वौ कर जोरि हैं देत प्रतापु ना तनिकु गुमान जु भामा को आई।।

उत्तिमु केरि विचारू हिया जौ जंगलु घासु कै रोटिनु खाई।।

भाखत चंचल राणा प्रतापु कबौ ना विरोधिनु शीशु झुकाई।।2।।

नीकु विचारू करमवति धारि मुगल सम्राट हु भाई बनाई।।

नीकै विचारू हिया उर धारि पन्ना हु प्रानु ते प्यारौ नसाई।।

नीकु विचारू रहा उर उर्मिला जंगल जंगल लखनु घुमाई।।

भाखत चंचल माया मा आईके अवधु नरेश जु प्रानु गँवाई।।3।।

कुल उद्धारु के खातिनु रावनु जंगलु आईके सीय चुराई।।

वचनु निभावनु खातिनु भीष्म अन्याय परे कँह बोलिहु पाई।।

नीकु विचारू ते मानव मानव आजु कँहा हठु ठानि हु पाई।।

भाखत चंचल नीकु विचारू ते गाँधी महान जगत कहि जाई।।4।।

आशुकवि रमेश कुमार द्विवेदी, चंचल।

ओमनगर, सुलतानपुर, उलरा, चन्दौकी,

अमेठी ,उ.प्र.।

मोबाइल…. 8853521398,9125519009।।

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