साहित्य

विश्वास

पिंकी सिंघल


विश्वास भक्त को अपने प्रभु पर होता है,
भक्ति से ही अपनी सारी वो दुनिया संजोता है।
करता है उम्र भर वह बस मिलने के जतन,
प्रभु दरस की हरदम वो बाट जोहता है।।

विश्वास प्रेमी को अपने प्रेम पर होता है,
बेचैनियां पाल वो अपना चैन खोता है।
हंसता है तो वो सिर्फ़ दुनिया को दिखाने के लिए,
बेवफाई पा प्रेम में वो दिन रात रोता है।।

विश्वास अपनों का अपनों पर होता है,
खुशियां उनको देना हम सबका सपना होता है।
मिलती है चोट अक्सर ही अपनों से,लेकिन
धोखा खोकर भी उन पर भरोसा अपना होता है।।

विश्वास का बीज वर्षों में प्रस्फुटित होता है,
छल का कीड़ा इसके सुंदर भाव को खोता है।
रिश्तों को दिल से निभाना सीख लो यारों,क्योंकि
विश्वास को कायम रख पाना बड़ा ही मुश्किल होता है।।

पिंकी सिंघल
अध्यापिका
दिल्ली

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