साहित्य

“”ये लफ्ज आइने हैं””

नम्रता श्रीवास्तव

यह लफ्ज़ आइने हैं परवरिश बताते हैं,
संस्कारों की झलक दिखाते हैं,
इस्तेमाल करो लफ्जों को करीने से,
हमारे परिवार का माहौल यह बताते हैं।

ये आइना है हमारी विनम्रता का,
ये आइना है हमारी जिंदगी का,
ये आइना है हमारी हार- जीत का,
ये आइना है हमारे विचारों का।

जीवन बगिया में पुष्प खिले हों,
पुष्पों में जब खुशबू ना मिली हो
सद्भावना की बहे तब बयार,
लफ्जों में सौम्यता घुली हो।

प्यारा घर संसार बसाया,
सुंदर साधनों का ढेर लगाया,
नहीं किया किंचित प्रेम पूर्ण व्यवहार,
लफ्जों की आइने में सब धुंधलाया।

लफ्ज़ों के प्यारे मधुबन को,
शूल नहीं बनने देना है,
मृदुभाषी बनकर हम सबको,
बंधुत्व, प्रेम का संदेश देना है।

नम्रता श्रीवास्तव (प्र०अ०)
प्रा०वि०बड़ेहा स्योंढा
क्षेत्र-महुआ, जिला-बांदा

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