राष्ट्रीय

मध्यभारतीय हिन्दी साहित्य सभा की महिला साहित्यकार गोष्ठी “लघुकथा विशेष” के रूप में हुई सम्पन्न

ब्यूरो रिपोर्ट

 ग्वालियर । मध्यभारतीय हिन्दी साहित्य सभा ग्वालियर की महिला साहित्यकार गोष्ठी राष्ट्रीय स्तर पर गत रविवार "लघुकथा विशेष" के रूप में वर्चुअली आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता डॉ पद्मा शर्मा जी ने की। कार्यक्रम में मुख्य आतिथ्य राजधानी भोपाल से लघुकथा की सशक्त हस्ताक्षर कान्ता रॉय जी एवं विशिष्ट आतिथ्य रायपुर से वरिष्ठ साहित्यकार रूपेंद्र राज तिवारी जी का रहा। सारस्वत अतिथि के रूप में सीमा जैन जी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन व संयोजन डॉ करुणा सक्सेना ने एवं आभार डॉ मंजुलता आर्य ने किया।
 डॉ प्रतिभा द्विवेदी की सुमधुर सरस्वती वन्दना के साथ ही कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। जिसमें पूरे देश से अनेक महिला साहित्यकारों ने अपनी सहभागिता की।
 अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ पद्मा शर्मा ने लघुकथा के कथ्य व शिल्प पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लघुकथा के लिखने की प्रक्रिया एक भवन निर्माण की भांति होती है, जिसके लिए उचित प्लॉट व मजबूत सामग्री की आवश्यकता होती है। उचित भाव व कथ्य के प्रयोग से ही एक लघुकथा सफल कहलाती है। अपने उद्बोधन में उन्होंने प्रतीक व बिम्ब के प्रयोग पर मार्गदर्शन प्रदान किया। मुख्य अतिथि कान्ता रॉय ने समकालीन लघुकथाकारों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वर्तमान जीवन की समस्याएं केवल आज का लघुकथाकार ही उजागर कर सकता है। उन्होंने अपने वक्तव्य में लघुकथा के क्रमिक विकास एवं समस्या व समाधान पर विस्तार से चर्चा की साथ ही उन्होंने ग्वालियर में जल्द ही एक लघुकथा कार्यशाला आयोजित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में पढ़ी गईं सभी लघुकथाओं का वह यथाशीघ्र सम्पादन करेंगी। रायपुर से जुड़ी विशिष्ट अतिथि रूपेंद्र राज तिवारी ने मंच पर पढ़ी गईं सभी लघुकथाओं की विस्तृत समीक्षा कर लघुकथा वाचकों को उचित मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने लघुकथा में पंचलाइन के प्रयोग व महत्व पर चर्चा की साथ ही उन्होंने महिला साहित्यकारों की प्रशंसा करते हुए लघुकथा में आ रहे समकालीन बदलावों को भी इंगित किया। विषय विशेषज्ञ के रूप में जुड़ीं सारस्वत अतिथि सीमा जैन ने अपने वक्तव्य में लघुकथा विधा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इस विधा के विभिन्न पहलुओं जैसे शीर्षक, कथ्य व कथा के कसाव की सटीकता व महत्व को बतलाया। उन्होंने लघुकथा विधा के क्षेत्र में अपना परचम लहराने वाले विभिन्न लेखकों के उदाहरण देते हुए समकालीन व भावी पीढ़ी के लेखकों को मार्गदर्शन दिया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राजरानी शर्मा ने आयोजन की सफलता पर बधाई देते हुए सभी रचनाकारों को प्रोत्साहित किया।
 आयोजन में डॉ वन्दना कुशवाह ने "श्रेय", पुष्पा मिश्रा ने "जीना इसी का नाम है", रायपुर से नीलिमा मिश्रा ने "भूले बिसरे", डॉ मन्दाकिनी शर्मा ने "एक चम्मच भर", कानपुर से प्रेरणा गुप्ता ने "धुँआ", जबलपुर से मधु जैन ने "कांजी हाउस", लुधियाना पंजाब से सीमा वर्मा ने "तम के पहरेदार", रायपुर से विजया ठाकुर ने "शिखण्डी कर दो", जबलपुर से चंदादेवी स्वर्णकार ने "महादान" एवं व्याप्ति उमड़ेकर ने "ममता का छाता" नामक लघुकथाओं का वाचन किया।
 कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतों से साहित्यकार जुड़े जिनमें उपेंद्र कस्तूरे, रामचरण चिराड़ 'रुचिर', डॉ ज्योत्स्ना सिंह राजावत, तृप्ति श्रीवास्तव, पुष्पा शर्मा,  धर्मेन्द्र शर्मा, राजीव सक्सेना, संगीता गुप्ता, राखी शर्मा व ज्योति शर्मा सहित अनेक साहित्यानुरागियों ने उपस्थिति दी। महिला साहित्यकार गोष्ठी का "लघुकथा विशेष" कार्यक्रम अत्यंत सफल आयोजन रहा एवं श्रोताओं ने साहित्यकारों व उनकी रचनाओं की सराहना की।
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