आध्यात्मिककवितासाहित्य

राम प्रभु के अनन्य स्नेही अंजनीसुत

__पिंकी सिंघल

चैत्र शुक्ल एकादशी को जन्मे थे भक्त हनुमान
लाए संजीवन ढूंढ दिया उन्होंने लक्षमण को जीवन दान

राम प्रभु के अनन्य स्नेही अंजनीसुत भी जिनका नाम
दुखहर्ता सुखकर्ता हैं वो,हैं संकटमोचन हनुमान

भक्तों को अपने न कभी बिसराते,हैं शक्ति का दूजा नाम
नर नारी सब मिलकर करते,उनकी महिमा का गुणगान

शिव जी के अवतार हुए जो वो बजरंगी हैं विद्वान
स्वयं लंकापति भय खा गए थे उनके लोहे को मान

दुष्टों पर तान भृकुटि सदा वो लेते बस राम का नाम
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता करते सबका कल्याण

केसरी नंदन वो मारुति नंदन हैं गुणों की पूरी खान
भूत पिशाच निकट न झांके सुनकर हनुमन का नाम

पूजे जाओगे सर्वत्र तुम्हीं होगा सर्वत्र तुम्हारा नाम
अजर अमर अपूर्व बलशाली पाए श्रीराम से ये वरदान

उनसे बड़ा ना भक्त है कोई न इस जग में दूजा नाम
कृपा रखना तुम अपनी विक्रम बनाना बिगड़े मेरे सारे काम

पिंकी सिंघल
अध्यापिका
शालीमार बाग
दिल्ली

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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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