आध्यात्मिकसाहित्य

✝︎मोहन-चालीसा✝︎

(दोहा)

__ज्ञानेन्द्र पाण्डेय “अवधी-मधुरस”

काली-खोह विराजते , बाबा मोहन राम ।
पहिचाने सारा जगत , कलयुग के सुखधाम ।।

बाबा मोहन राम हैं , मोहन के अवतार ।
करते जे नर अर्चना , उनके बेड़ा पार ।।

(चौपाई)

खोली अनुपम दिव्य निराली ।
भक्तन झोली रहे न खाली ।। 1।।

जगमग-जगमग जलती ज्योती ।
चारों ओर उजाला करती ।।2।।

लीलाऐं चहुँ करत कमाली ।
पत्ता-पत्ता डाली-डाली ।।3।।

आँखी-अँधनि कोढ़िन काया ।
बाँझनि पुत्र निर्धननि माया ।।4।।

सबकी झोली भरते बाबा ।
सबके कष्ट निवारक बाबा ।।5।।

प्रेम भाव ते जे जन ध्यावै ।
मनोकामना पूरण पावै ।।6।।

भारी चमत्कार चहुँ व्यापा ।
सकल जगत करता है जापा ।।7।।

अल्प-ज्ञान महिमा तव भारी ।
वर्णन कैसे करूँ तिहारी ।।8।।

अर्पण-तर्पण जे नर करहीं ।
वे नर भवसागर से तरहीं ।।9।।

हर दिन जे बाँटैं परसाधी ।
छावै नाहीं उन पर व्याधी ।।10

मिलकपुर है धाम तुम्हारा ।
अलवर विदित सकल संसारा ।।11।।

आलूपुर भी बाबा छाए ।
अंतर्यामी भी कहलाए ।।12।।

कुछ भक्तन दंडोती करहीं ।
पैदल भीड़ नाम उच्चरहीं ।।13।।

श्रद्धा ते जे भोग लगावै ।
देसी घी से ज्योति जलावै ।।14।।

जलहरी जे पानी भरते ।
बाबा उनके दुख है हरते ।।15।।

बाबा का अवतारी चोला ।
याही सब जयकारा बोला ।।16।।

चींटी पक्षिन भोग जिमावै ।
द्रोणव्रती उत्तम फल पावै ।।17।।

नंदू चरवाहा इक बभना ।
किशन भक्ति माहीं वा मँझना ।।18।।

गाय घिराई दर्शन पाई ।
पीढ़ी -दर -पीढ़ी भक्ताई ।।19।।

मोहन राम-नाम भलु जपना ।
कलयुग याही ते है तरना ।।20।।

आलूपुर बाबा कै धामा ।
कालू मिसिर जपत तव नामा ।।21।।

गोरधन करै लंबरदारी ।
वा हौ तौ बड़ अत्याचारी ।।22।।

कान्हा वाही गाय चरावै ।
काम-काज सबही निपटावै ।।23।।

एक दिना बोला अभिमानी ।
झिवना जा पैसा भरवानी ।।24।।

सुबह समय जाऊँ बतलाया ।
दुष्ट तभी कोड़ा बरसाया ।।25।

बालक बन जंगल बिच आये। ।
अर्ध रात दर्शन दिखलाये ।।26।।

पंच रतन कान्हा हौ पाये ।
वट वृक्षा नीचे खुदवाये ।।27।।

प्रेमदास तव भक्ती मायल ।
जीवित कियो हिरण इक घायल ।।28।।

इंग्लिशतानी खोपड़ी घूमी ।
गौ चारे हित छोड़ी भूमी ।।29।।

रकमा सिंह बाबा का नेही ।
बाबा वाको ड्यूटी खेही ।।30।।

नेतराम बाबा का भक्ता ।
निशि- दिन बाबा माही रमता ।। 31।।

उदर शूल पीड़ित भै जबहीं ।
मुकुट एक्सरा उभरो तबहीं ।।32।।

सर्जन देख भयो भौचक्का ।
लागे नाही कौनिउ तुक्का ।।33।।

बाबा मंदिर चाख भभूती ।
दूर भयो सारी परतीती ।।34।।

जबहीं चोर चुराये गैया ।
आंधरि बन चिल्लाए मैया ।।35।।

बाबा के जब कीन्ह्यो जापा ।
ज्योति मिली गायब संतापा ।।36।।

बाबा भोले किशन मुरारी ।
घूमतु हौं दुआरी-दुआरी ।।37।।

जोहड़ डिंग गूलर की छाया ।
बाबा ने भी रास रचाया ।।38।।

जोहड़ माहीं जेहि नहावै ।
वाको सकल पाप धुल जावै ।।39।।

नीला घोड़ा खुर जे पूजै ।
यश-वैभव चारों दिशि गूंजै ।।40।।

          ( हुण्डली )

मोहन रुपी भक्ति धन , धन-धन नंदू भक्त ।
ध्यावत जे फल पावहीं , तन-मन- धन अनुरक्त ।
तन मन धन अनुरक्त , वाहि ना संकट छावै ।
बाबा पहरेदार , कतौ का संकट आवै ।
“मधुरस” कर अरदास , शरण हमहूँ का लीजै ।
सिर पर रख दो हाथ , कबहुँ ना कम्मर भीजै ।।

( बाबा के पद्मवत्चरणों में पुष्पवत् समर्पित )
स्वरचित व सर्वाधिकार सुरक्षित

(यह पवित्र स्थान राजस्थान राज्य के अलवर जिले में पलवल के पास है । मिलकपुर/ आलूपुर दो गांवों की सीमाएं आपस में मिल रही है । वहीं पर बाबा मोहन राम का भव्य मंदिर है । इन्हें राधा बल्लभ ,योगेश्वर श्रीकृष्ण का अवतार माना जाता है । भक्तजन श्रद्धा से पूजा-अर्चना कर दैहिक/भौतिक/ दैविक कष्टों से मुक्ति पाते हैं । उनका जीवन सफल व खुशहाल हो जाता है । )
,श्रद्धा से ही फल मिलता है और बिना विस्वास के श्रद्धा का प्रकाट्य भी नहीं होता है ।’
धन्यवाद!

  ज्ञानेन्द्र पाण्डेय "अवधी-मधुरस" अमेठी , उत्तर-प्रदेश

                    वरिष्ठ कोषाधिकारी शामली 

                             
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Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

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