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श्री वृन्दावन धाम

“वृन्दावन के वृक्ष कौ, मर्म न जाने कोय।
डारि-डारि और पाति पै,श्रीराधे-राधे होय।।”

भारत देश एक ऐसा देश है जहां आध्यात्म और धर्म को सबसे ऊंचा माना जाता है, सनातन धर्म यहां की सबसे प्राचीन संस्कृति है। यहां तीर्थ स्थलों और धार्मिक नगरों की गिनती कर पाना बहुत ही कठिन है। चार धाम-सप्त पुरियां और प्रयागों के साथ-साथ यहां अनगिनत ऐसे नगर भी बसे हैं जहां परब्रह्म परमात्मा ने धरती पर अवतरित होकर लीलाएं की हैं। ब्रजमण्डल जहां भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया और अनेकानेक लीलाएं कीं। ब्रज मण्डल में वैसे तो कई ऐसे शहर,नगर,कस्बे, गांव हैं जहां पर श्रीकृष्ण ने अपनी बाललीलाओं का दर्शन ब्रजवासियों को कराया। उन्ही स्थानों में से भगवान श्रीकृष्ण को जो सबसे अत्यधिक प्रिय नगर था वह श्रीधाम वृन्दावन है। श्रीधाम वृन्दावन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित एक आध्यात्मिक शहर है। यह ब्रज भूमि क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में से एक है। भगवान श्री कृष्ण ने अपने बचपन के दिन यहीं बिताए थे। यह शहर मथुरा से लगभग 10 कि.मी. दूर है। आगरा-दिल्ली राजमार्ग पर स्थित वृंदावन धाम राधा और श्री कृष्ण की पूजा के लिए समर्पित है। यह पूर्व में एक वन था और यहां सबसे अधिक वृंदा के पौधे होते थे, इसीलिए इस वन का नाम वृन्दावन हो गया।यहां अनेक मंदिर हैं। वैसे तो वृंदावन धाम में वर्ष भर पर्यटक आते हैं लेकिन अक्षय तृतीया, बिहार पंचमी, कृष्ण जन्माष्टमी, अधिक मास, कार्तिक मास के समय यहां दर्शन को आने वाले भक्तों-श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है।

अति प्राचीन है वृन्दावन धाम
माना जाता है कि वल्लभाचार्य 11 वर्ष की उम्र में वृन्दावन आए थे। बाद में उन्होंने भारत में 3 तीर्थस्थानों का प्रचार किया और नंगे पांव जाकर 84 स्थानों पर श्रीमदभगवद्गीता का प्रवचन दिया। वल्लभाचार्य जी हर वर्ष चतुर्मास वृन्दावन में हीं करते थे।उनके चतुर्मास व पुष्टिमार्ग ने वृन्दावन के लोगों को बहुत प्रभावित किया।
श्रीधाम वृन्दावन का सार 16वीं शताब्दी तक विलुप्त होने लगा था, जब इसे चैतन्य महाप्रभु द्वारा फिर से खोजा गया। सन 1515 में, चैतन्य महाप्रभु ने भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं और उनके अतीत से जुड़े, कुछ विलुप्त हुए पवित्र स्थानों का पता लगाने के उद्देश्य से वृन्दावन की पदयात्रा की। माना जाता था कि दिव्य आध्यात्मिक शक्ति द्वारा वह श्री कृष्ण के अतीत के सभी महत्वपूर्ण स्थानों का वृन्दावन और ब्रज के अन्य स्थलों का जो कि भगवान श्रीकृष्ण व उनकी बाललीलाओं से सम्बंधित था, चैतन्य महाप्रभु जी ने उनको खोज निकाला। इसके बाद भक्तिमती मीराबाई भी मेवाड़ छोड़ कर वृन्दावन आ गई थीं।अन्य कृष्ण भक्त भी जैसे सूरदासजी,स्वामी हरिदास जी, रसखान जी भी वृन्दावन में रहकर साधना कर चुके हैं,साथ ही उन्होंने यहां भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित अपने पदों की रचना भी करते थे। यहां तक कि श्रीराम भक्ति के महाकवि और श्रीरामचरितमानस के रचियता गोस्वामी तुलसीदास जी भी वृन्दावन आ चुके हैं और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का दर्शन भी कर चुके हैं। इसका मुख्य प्रमाण वृन्दावन के ज्ञान गुदड़ी स्थित श्री तुलसीराम दर्शन स्थल मन्दिर है। यहीं पर गोस्वामी तुलसीदास जी को भगवान श्रीकृष्ण ने उनके परमाराध्य श्रीराम जी के रूप में दर्शन दिए थे।

यहां होते हैं श्री यमुना महारानी की पवित्र धारा के आलौकिक दर्शन। वृन्दावन यमुना नदी से तीन ओर से घिरा हुआ है और इसकी प्राकृतिक छटा बहुत निराली है। यहां पर यमुना स्नान, आरती व दर्शन करने के लिए अनेकों घाट बने हुए हैं जिनमें से कई तो विलुप्त हो चुके हैं। वर्तमान में जिन घाटों के दर्शन होते हैं उनमें मुख्यतः – वाराह घाट, कालीयदमन घाट, सूरज घाट, जुगल घाट,विहार घाट, इमलीतला घाट,श्रृंगार घाट,गोविंद घाट,चीर घाट, भ्रमर घाट,केशीघाट,धीर समीर घाट,जगन्नाथ घाट, पानीघाट, आदिबद्री घाट,राज घाट, हैं। इनके अलावा नवनिर्मित ब्रह्मर्षि देवराह बाबा घाट आदि हैं।
वृन्दावन की एक विशेषता है कि यहां अनेक ऐतिहासिक धरोहर, सैंकड़ों आश्रम और कई गौशालाएं हैं। गौड़ीय वैष्णव, वैष्णव और हिन्दुओं के धार्मिक क्रिया-कलापों के लिए वृन्दावन विश्वभर में प्रसिद्ध है। सूरदास, स्वामी हरिदास, चैतन्य महाप्रभु के नाम वृन्दावन से हमेशा के लिए जुड़े हुए हैं।

दिव्य प्राचीन एवं भव्य प्रख्यात मन्दिर
यह एक ऐसा शहर है जहां छोटे और बड़े हजारों मंदिर स्थित हैं। यहां पूरा वर्ष श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। वृन्दावन के प्रमुख मन्दिर –

ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर
बांके बिहारी मंदिर वृन्दावन का सबसे प्रख्यात मन्दिर है, जो श्री कृष्ण को समर्पित देश के सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। यह मंदिर राजस्थानी शैली में बना है और इसमें भगवान श्री कृष्ण की छवि बाल रूप में दिखाई देती है।जिनके दर्शन के लिए हर समय भक्तों का तांता लगा रहता है।

सेवाकुंज
प्राचीन लताओं और बैलों से सुसज्जित एक दार्शनिक स्थान जहाँ पर प्राचीन वृन्दावन के दर्शन होते हैं। गोस्वामी जनों का कहना है कि हर रात्रि को यहां आज भी श्रीकृष्ण और राधा रानी गोपियों के साथ रासलीला करते हैं।

प्रेम मंदिर
वृन्दावन में स्थित यह भव्य प्रेम मंदिर राधा-कृष्ण और सीता-राम को समर्पित है। सफेद संगमरमर से निर्मित और बहुत जटिल नक्काशी से सजा यह मंदिर अपनी स्थापत्य सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।ब्रज वासियों के लिए यह मंदिर जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की अद्भुत देन है।

इस्कॉन मंदिर
इस्कॉन मंदिर श्री कृष्ण-बलराम मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। इस मंदिर को 1975 में भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के निर्देश पर बनाया गया था।वृन्दावन का यह मन्दिर इस्कॉन संस्था का अद्भुत केंद्र है।

श्री राधा रमण मंदिर
यह मंदिर गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा 1542 में बनवाया गया था। इस मंदिर में राधा की मूर्ति मौजूद नहीं है, भगवान श्री कृष्ण के पास रखा एक मुकुट ही श्रीराधा रानी की अद्भुत महिमा को दर्शाता है।

गोपेश्वर महादेव मंदिर वृन्दावन
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और भगवान को एक गोपी के रूप में दर्शाया गया है। भक्त यहां शिवलिंग पर यमुना का पवित्र जल डालते हैं। वृन्दावन धाम के मंदिरों में यह मंदिर देखने लायक है।

निधिवन
निधिवन एक ऐसा रमणीक पवित्र स्थल है जहां पर स्वामी श्री हरिदास जी ने अपनी संगीत साधना के बल पर ठाकुर श्री बाँके बिहारी जी महाराज को प्रगट किया था। ब्रजवासियों का मानना है कि श्रीकृष्ण और राधा रानी आज भी यहां नित्यविहार लीला करते हैं।

शाहजी मंदिर
शाहजी मंदिर का निर्माण वर्ष 1876 में शाह कुंदन लाल ने करवाया था। यह भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। संगमरमर से बने इस मंदिर के मुख्य देवता को छोटा राधा रमण के नाम से जाना जाता है।

श्री रघुनाथ मंदिर
यह मंदिर भगवान विष्णु और उनकी पत्नी लक्ष्मी को समर्पित है। यह वृंदावन के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है और ऊंची दीवारों से घिरा हुआ है।

कात्यायनी शक्तिपीठ
कात्यायनी पीठ मंदिर 51 शक्ति पीठों में से एक है यहां पर सती माता के केश गिरे थे और इसे उमा शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है। यह वृन्दावन के राधाबाग में स्थित है।इस मंदिर में भूतेश्वर महादेव मंदिर के भीतर स्थित है।

इनके अलावा भी वृन्दावन में मदनमोहन देव जी,गोविंद देव जी, राधाबल्लभ मन्दिर, गोपीनाथ मन्दिर, जुगलकिशोर मन्दिर, गोकुलानंद जी, पागल बाबा मंदिर, कांच मन्दिर, जयपुर मन्दिर, राधादामोदर मन्दिर, राधा श्यामसुन्दर मन्दिर, गोकुलानंद जी, ऐसे अनेकानेक प्राचीन और नवनिर्मित मन्दिर हैं जिनका दर्शन करके आप प्राचीन वृन्दावन की अनुभूति कर सकते हैं।
अगर आप आध्यात्मिक विचारों के व्यक्ति हैं और भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हैं तो आपके लिए वृन्दावन में इन स्थानों को देखना काफी सुखमय हो सकता है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
वृंदावन हिंदुओं के सबसे अधिक देखे जाने वाले तीर्थ स्थानों में से एक है। यहां का मौसम उत्तर भारत के बाकी हिस्सों की तरह ही रहता है।
वृंदावन में जनवरी से मार्च और अक्तूबर से दिसम्बर के दौरान घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। इन महीनों के दौरान मौसम सौम्य और सुखद रहता है और वृंदावन के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए आदर्श समय होता है।

कैसे पहुंचें
वृंदावन पहुंचने के लिए सीधे कोई सुविधा नहीं है। पहले आपको इसके आस-पास के स्टेशनों, हवाई अड्डों और बस स्टैंडों पर पहुंचना पड़ता है। आइए जानते हैं वृंदावन पहुंचने के लिए क्या विकल्प मौजूद हैं।
निकटतम हवाई अड्डा आगरा में खेरिया एयरपोर्ट है जो वृंदावन से 53 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एयरपोर्ट देश के प्रमुख शहरों से हवाई मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यहां पहुंचने के बाद आप बस या टैक्सी के माध्यम से वृंदावन पहुंच सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा में है जो वृंदावन से 10 किलोमटीर दूर है। मथुरा कैंट और मथुरा जंक्शन के लिए देश भर के प्रमुख शहरों से नियमित ट्रेनें चलती हैं। स्टेशन पहुंचने के बाद आप टैक्सी या मोटर रिक्शा से वृंदावन धाम पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
देश के प्रमुख शहरों से सीधे वृंदावन के लिए कोई बस सेवा नहीं है। यहां का निकटतम बस स्टैंड मथुरा है।
मथुरा तक आप दिल्ली से बस द्वारा आ सकते हैं। इसके अलावा भरतपुर और राजस्थान मथुरा से 45 किलोमीटर दूर हैं जहां से नियमित बसें आती हैं।
इसके माध्यम से भी मथुरा बस स्टैंड पहुंचा जा सकता है। फिर ऑटो रिक्शा या टैक्सी से वृंदावन जाया जा सकता है।

लेखक
राधाकांत शर्मा
युवा वार्ताकार एवं साहित्यकार
श्रीधाम वृन्दावन

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