उत्तरप्रदेशउत्तराखंड

चाँद उतरता नभ आँचल में

डॉ प्रतिभा गर्ग  हरियाणा

साँझ प्रीत की सुभग सलोनी, चाँद उतरता नभ आँचल में।
रम्य रजत की अदा निराली, हर्ष विदित हर महके पल में।

नेह रश्मियाँ सजा रही हैं, नयनों के मतवाले घट को।
नागिन से बलखाते कुंतल, महकाते प्रियवर के पट को।
सुधा सजल अधरों का चुंबन, ज्यों अमृत भर दिया हो तल में।

साँझ प्रीत की सुभग सलोनी, चाँद उतरता नभ आँचल में।

सौंप दिया है तन-मन अपना,दिव्य देहरी की मृदुल यामिनी।
बीते क्षण यादों की निधियाँ, उर अंतस बस प्रीत रागिनी॥
मेरी चाहत के मेघों ने, घेरा नख- शिख मन अविचल में।

साँझ प्रीत की सुभग सलोनी, चाँद उतरता नभ आँचल में।

भाव सजाकर धवल चंद्रिका, धरती-अंबर जगमग तारे,
नेह नयन मोती झर जाएँ, यादें झूमे पाँव पसारे।
प्रीत प्रणय की शुचित साधना, उदित हुई इस नूतन पल में।

साँझ प्रीत की सुभग सलोनी, चाँद उतरता नभ आँचल में।

विरह वेदना उठे ज्वार सम, मन मंदिर की तुम बस मूरत,
शीतलता मिलती है नूतन, नेह सृजित देखूँ जब सूरत।
प्रीत बिखेरे, प्रीत बटोरे, शामिल तू अब आज व कल में।

साँझ प्रीत की सुभग सलोनी, चाँद उतरता नभ आँचल में।

डॉ प्रतिभा गर्ग
हरियाणा

100% LikesVS
0% Dislikes

Shiveshwaar Pandey

शिवेश्वर दत्त पाण्डेय | संस्थापक: दि ग्राम टुडे प्रकाशन समूह | 33 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय | समसामयिक व साहित्यिक विषयों में विशेज्ञता | प्रदेश एवं देश की विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं मीडिया संस्थाओं की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी, पत्रकारिता मार्तण्ड, साहित्य सारंग सम्मान, एवं अन्य 200+ विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मानित |

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button
error: Content is protected !!