उत्तराखंड

समाधि लेकर पंचतत्व में विलीन हुई परम पूज्य आर्यिका विलीन भारती माता जी


लखनऊ। सआदतगंज स्थित पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर मैं चल रहे चातुर्मास के दौरान विलीन भारती माताजी ने इस संसार को त्याग कर समाधि ले ली। इस दौरान मंदिर प्रांगण में श्री पारसनाथ भगवान का निर्माण लाडू चढ़ाया जा रहा था। जिसके बाद उनका वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच अंतिम क्रिया सकुशल संपन्न हुई। प.पूज्य आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज के परम पूज्य क्षुल्लक रत्न श्री 105 विगुण सागर महाराज जी ने बताया कि महरौली शिवपुरी में जन्मी कपूरी बाई ने 14 अगस्त 2012 को ब्रह्मचारिणी की दीक्षा लेकर ग्रस्त जीवन त्याग दिया था। उसके बाद उन्होंने बीते दिनों आर्यिका की दीक्षा ली थी। जिसके बाद उन्हें विलीन भारतीय माता जी के नाम से सुशोभित किया गया था।रविवार को श्री पार्श्वनाथ भगवान के निर्माण लाडू चढ़ाएं जाने के दौरान उनका समाधि करण हो गया। जिसके बाद उनकी अंतिम यात्रा धूमधाम से निकाली गई। जो सआदतगंज में ही स्थित जैन मंदिर के सभागार में संपन्न हुई।इसके बाद वैदिक मंत्र उच्चारण के बाद उनका अंतिम संस्कार कराया गया।

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