उत्तराखंड

विपनेट क्लब द्वारा एक दिवसीय नेशनल वेबीनार का ऑनलाइन आयोजन


ग्वालियर/ देहरादून
विपनेट क्लब विज्ञान बाल जन ग्रुप (आल इंडिया मेरिटोरियस क्लब ) एवं शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ग्वालियर एवं डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम साइंस क्लब देहरादून उत्तराखंड के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय नेशनल वेबिनार का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में डॉ अरविंद सी रानाडे साइंटिस्ट एफ विज्ञान प्रसार , विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार तथा अध्यक्षता प्राचार्य जे पी मौर्य ने की । मुख्य वक्ता के रूप में साधना पंवार, प्रख्यात विज्ञान संचारक एवं
डॉ. दीप्ति गौड़ विपनेट क्लब कोआर्डिनेटर उपस्थित रहे । संचालन दुर्गेश थपलियाल क्लब कोऑर्डिनेटर एवं अंशुल थपलियाल कार्यक्रम निर्देशक ने सन्युक्त रूप से किया । वेबिनार का विषय “विज्ञान अध्ययन और अध्यापन में मातृभाषा की भूमिका” पर व्याख्यान आयोजित किया गया जिसमें मुख्य वक्ता के रुप मे उपस्थित साधना पंवार, प्रख्यात विज्ञान संचारक ने कहा कि मातृभाषा में सरल तरीके से सिखाना आसान होता है । विज्ञान में रूचि पैदा करने के लिए आवश्यक है कि बच्चो को उनकी मातृभाषा में विज्ञान समझाया जाए । विज्ञान जीवन जीने की एक पद्धति है एक दृष्टिकोण है । तो उसको जीवन मे हर जगह लागू करता है अतः यदि मातृभाषा मे विज्ञान पड़ेगा तो बेहतर ढंग से सीख सकेगा ओर मटेरियल वर्ल्ड से जुड़ सकेगा । हमारे देश मे विविध भाषाएँ ओर बोलियां हैं । इसलिये स्ट्रांग medium के रुप मे मातृभाषा उपयोगी हो सकती है । विज्ञान का ज्ञान निचले तबके तक पहुंचाने में क्षेत्रीय बोली व भाषाएं शिक्षण मे ज़रूरी हैं ।
मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शक डॉ. अरविंद रानाडे ने कहा कि विपनेट क्लब्स द्वारा विज्ञान प्रचार प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है । विपनेट क्लब द्वारा चयनित आज का विषय शिक्षको ओर विद्यार्थियों, विज्ञान संचारकों के लिए अत्यंत आवश्यक है जैसे मै स्वयं मराठी मातृभाषा से हु जब विचार आते है तो मातृभाषा में आते है । हमारी नई शिक्षा नीति में भी मातृभाषा के शिक्षकों पर बल दिया गया है , इस विषय को जन जन तक विपनेट क्लब के द्वारा कोने कोने तक पहुंचाया जाएगा । मुख्य वक्ता डॉ. दीप्ति गौड़ ने मातृभाषा मे विज्ञान शिक्षण की चुनौतियों एवं समाधान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मातृभाषा में मानक शब्दावली निर्माण में कुशल वेज्ञानिको, शिक्षाविद, साहित्यकारों का योगदान हो सकता है । विभीन्न भाषाओं में पारिभाषिक शब्दावली निर्माण कर पुस्तकें उपलब्ध करवा के अध्यापन को सुगम बनाया जा सकता है । उल्लेखनीय है कि विपनेट क्लब्स के द्वारा सतत रुप से वैज्ञानिक चेतना जगाने हेतु कार्य किये जा रहे हैं । आभार प्रदर्शन दुर्गेश थपलियाल प्रोग्राम कोर्डिनेटर ने किया । वेबिनार में देश भर से लगभग 200 प्रतिभागियों ने सहभागिता की । जिन्हे आयोजको की ओर से
ई प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए ।

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